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खूब हुआ हंगामा, पराग दुग्ध संघ और समिति का नहीं बना महासंघ

Thu, 29 Oct 2015 02:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह जिलों के पराग दुग्ध संघ और समितियों को मिलाकर महासंघ बनाने के लिए बुलाई गई बोर्ड बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। बैठक से पहले ही चेयरमैन के कक्ष में डायरेक्टरों ने चेयरमैन पति और जीएम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। जिसके बाद चेयरमैन पति और जीएम आपस में भिड़ गए। दोनों के बीच तू-तू, मैं मैं और तीखी नोकझोंक हो गई। बाद में डायरेक्टरों ने बोर्ड बैठक का बहिष्कार कर दिया।
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गगोल सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ की बुधवार को शासन के निर्देश पर बोर्ड बैठक बुलाई गई थी। इसमें मुख्य रूप से मेरठ, बागपत, हापुड़  नोएडा, बुलंदशहर, गाजियाबाद जिलों की दुग्ध संघ एवं समितियों को एक करके महासंघ बनाने का प्रस्ताव पास होना था। बैठक दोपहर 12 बजे से सभागार में शुरू होनी थी।

इससे पहले ही चेयरमैन के कक्ष में डायरेक्टरों ने जब पिछली बोर्ड में पास प्रस्तावों पर कार्रवाई न होने का कारण पूछा तो चेयरमैन पति वेदप्रकाश बेदी और जीएम बी.बी. बेरा ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने शुरू कर दिए। इसके बाद विगत बोर्ड बैठक में मजदूरों के टेंडर निरस्त करने के प्रस्ताव संबंधी प्रोसीडिंग पर चेयरमैन के हस्ताक्षरों को लेकर दोनों के बीच बहस हो गई। जीएम ने चेयरमैन के हस्ताक्षरों को फर्जी बताते हुए चेयरमैन से नई प्रोसीडिंग पर हस्ताक्षर कराने की बात कही।
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चेयरमैन पति ने स्पष्ट कह दिया कि हस्ताक्षर सही हैं और वे दूसरी किसी प्रोसीडिंग पर हस्ताक्षर नहीं कराएंगे। इसको लेकर जीएम और चेयरमैन पति के बीच तृ-तू, मैं मैं हो गई। वहां मौजूद डायरेक्टरों विपत सिंह, बलराज सिंह, योगेश प्रधान, सेंसरपाल, रामपाल सिंह और धर्मेंद्र ठाकुर ने दोनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन नोकझोंक चलती रही।

बात उस समय और बिगड़ गई, जब विपत सिंह सहित सभी डायरेक्टरों ने टेंडर निरस्त न करने के पीछे जीएम और चेयरमैन पर मिलीभगत के आरोप लगा दिए। जिसके बाद चेयरमैन इंद्रेश गुर्जर को प्रोसिडिंग पर अपने हस्ताक्षरों की गवाही देने के लिए डायरेक्टरों के बीच आना पड़ा। इसके बाद भी विवाद शांत नहीं हुआ और सभी डायरेक्टर यह कहकर चेयरमैन कक्ष से निकल गए कि वे बोर्ड बैठक नहीं होने देंगे।

डायरेक्टरों ने जीएम को घेरा
डायरेक्टरों ने जीएम को उनके ही कार्यालय में घेर लिया। आरोप लगाया कि डायरेक्टरों का कोई सम्मान नहीं रह गया है। तीन साल से दुग्ध संघ घाटे में जा रहा है। अधिकांश ठेकों में संघ को चूना लगाया जा रहा है। अगर मजदूरों के टेंडर निरस्त नहीं किए गए तो कोई बोर्ड बैठक नहीं होने देंगे। सारा लेखा-जोखा शासन को भेजेंगे।

लेटरबाजी के बाद बहिष्कार
इस हंगामे के बावजूद दोपहर 2.30 बजे सभागार में बोर्ड बैठक की तैयारी शुरू की गई। सभी निदेशक सभागार में पहुंच गए। उन्होंने जीएम को एक पत्र सौंपा। जिसमें लिखा था कि बोर्ड बैठक में चेयरमैन के साथ कोई बाहरी व्यक्ति नहीं आएगा। उस समय चेयरमैन इंद्रेश गुर्जर अपने पति के साथ अपने कार्यालय में थीं। एक कर्मचारी जब वह पत्र लेकर चेयरमैन के पास पहुंचा तो चेयरमैन ने उस पत्र पर नोटिंग कर दी कि असुरक्षा के चलते वह अपने पति को साथ रखती हैं। इसलिए बोर्ड बैठक में मेरे पति और सिक्योरिटी गार्ड का मौजूद रहना जरूरी है। इस पर सभी निदेशक नाराज हो गए और बोर्ड बैठक का बहिष्कार कर सभागार से बाहर आ गए।
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