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पराग 32 रुपये लीटर खरीद रहा दूध, फिर भी भुगतान नहीं

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मेरठ। कोरोना वायरस से उत्पन्न संकट में दुग्ध उत्पादक घिरते जा रहे हैं। एक तरफ उन्हें दूध का उचित दाम नहीं मिल रहा है। वहीं, गगोल पराग दुग्ध संघ भुगतान भी नहीं कर रहा है। इतना ही नहीं पराग दुग्ध संघ समितियाें के माध्यम से उत्पादकों पर घी खरीदने का दबाव बना रहा है। हालांकि पराग दुग्ध संघ का कहना है कि दुग्ध उत्पादकों का भुगतान करने के लिए महानगर में डोर टू डोर दूध, दही एवं पनीर आदि प्रोडक्ट बेचे जा रहे हैं। सभी उत्पादकों का 16 मार्च तक का भुगतान कराया जाएगा।
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गगोल पराग दुग्ध संघ मेरठ मंडल से प्रतिदिन ढाई लाख लीटर दूध खरीदता है। इसने ग्यारह दिन के भीतर तीन-चार बार दूध के रेट घटाए हैं। यानी कोरोना वायरस आने से पहले पराग दुग्ध संघ पशुपालकों से 44 रुपये प्रति लीटर दूध खरीद रहा था। जिसे घटाकर अब 32 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। प्लांट प्रशासन की मानें तो अधिक दूध की आपूर्ति होने की वजह से संघ ने यह निर्णय किया है। प्लांट में सूखे दूध एवं अन्य प्रोडक्ट्स का भंडार जमा हो गया है। उत्पादकों को भुगतान करने के लिए पिछले तीन दिन से महानगर में चार-पांच गाड़ियां भेजकर डोर टू डोर पेड़ा, पनीर, मावा एवं खीर आदि की बिक्री शुरू कराई है। इसके एकत्र राजस्व से उत्पादकों का बकाया भुगतान किया जाएगा। उधर, समितियों और प्रगतिशील दुग्ध उत्पादकों ने पराग दूध संघ की कार्यप्रणाली का विरोध करना शुरू कर दिया है। अरनावली निवासी मनीष भारती का कहना है कि एक तरफ जहां सरकार पशुपालकों को अधिक लाभ देने की बात कर रही है। इसके उलट धोखा किया जा रहा है। दूध का रेट लगातार हटाया जा रहा है। वहीं, समिति संचालकों पर दुग्ध उत्पादकों को घी आदि बेचने का दबाव बनाया जा रहा है। इस संबंध में प्लांट महाप्रबंधक विकास बालियान का कहना है कि अधिक दूध उत्पादन के कारण दूध के रेट कम हुए हैं। प्लांट में दूध एवं प्रोडक्ट अधिक रखने की क्षमता नहीं है। गाजियाबाद और नोएडा को पराग दूध की आपूर्ति घट गई है। उधर, संघ के चेयरमैन योगेंद्र चौधरी का कहना है कि दो-तीन दिन में सभी दुग्ध समितियों को 16 मार्च तक का भुगतान कर दिया जाएगा। इस संबंध में शासन से वार्ता जारी है। उन्होंने दूध खरीद एवं बिक्री के रेट में भारी अंतर पर कहा कि यह निर्णय सरकार को लेना है। अभी पुराने रेट 48,50 और 56 रुपये प्रति लीटर दूध बेचा जा रहा है।
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