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देश से बढ़कर कोई दौलत नहीं : मोहिंदर सिंह

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मेरठ। खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले, खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है। मशहूर शायर अल्लामा इकबाल का ये शेर 85 वर्षीय पूर्व जेसीओ सरदार मोहिंदर सिंह चाहल पर पूरी तरह सटीक बैठता है। सन 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ लोंगोवाला युद्ध में पराक्रम दिखा चुके मोहिंदर सिंह अब कोरोना युद्ध में भी 15 लाख 11 हजार रुपये दान करके दानवीर योद्धा बनकर उभरे हैं। अमर उजाला टीम शुक्रवार को उनके तोपखाना स्थित फार्म हाउस पर पहुंची तो मोहिंदर सिंह हरियाली के बीच अपनी पत्नी सुमन चौधरी के साथ कृषि कार्य करते मिले। उन्होंने अपने बारे में ने बताया कि वे अमृतसर जिले के गांव सुरसिंह जव्हाल के निवासी हैं। 1976 में सेना से रिटायर होने के बाद से मेरठ के ही होकर रह गए हैं।
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लोंगोवाला युद्ध पर बन चुकी फिल्म बॉर्डर : जेपी दत्ता के निर्देशन में बनी सनी देओल की ब्लॉकबस्टर फिल्म बॉर्डर लोंगोवाला युद्ध की कहानी पर बनी है। मोहिंदर सिंह ने ये लड़ाई लड़ी थी। जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो बताया कि मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी के नेतृत्व में 120 सैनिकों ने ये लड़ाई लड़ी थी। इस युद्ध में उन्हें अपनी एक आंख गंवानी पड़ी। कहा कि चांदपुरी बहुत शानदार व्यक्ति थे। वे सैनिकों से घुले-मिले रहते थे। युद्ध का हिस्सा होने के कारण सरकार ने उन्हें लीज पर ये पांच एकड़ का कृषि फार्म दिया था।
पीएफ, ग्रेच्युटी और पेंशन कर दी दान : जीवनभर की गाढ़ी कमाई को कोरोना के लिए दान करने के सवाल पर सिंह ने कहा कि उनके दो बेटे और दो बेटी हैं। एक बेटा और बेटी जर्मनी में नौकरी करते हैं। एक बेटा वियतनाम में और बेटी दिल्ली में नौकरी करते हैं। उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। कोरोना से पूरी दुनिया लड़ रही है। अपने देश और देशवासियों की मदद के लिए उन्होंने पीएफ, ग्रेच्युटी और पेंशन का हिस्सा मिलाकर 15 लाख 11 हजार रुपये पीएम केयर्स फंड में दान किया है। सिंह ने कहा कि देश से बढ़कर कोई दौलत नहीं होती। इस देश ने उन्हें नौकरी दी और अब पेंशन दे रहा है। इस संकट में हम सबका फर्ज बनता है कि कुछ न कुछ दान करें। अमीरों द्वारा दान नहीं करने पर सिंह ने नाराजगी जताई कि लोग अमीर भी देश के संसाधनों के बूते ही बने हैं। देश नहीं रहेगा तो जीकर क्या करेंगे। देशहित के लिए वे क्षमतानुसार दान करें।
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निर्धन कन्याओं की करा चुके शादी, 105 को दी साइकिल : मोहिंदर सिंह का दान के मामले में हाथ खुला है। उन्होंने बताया कि वे पंजाब में 10 निर्धन कन्याओं की शादी करा चुके हैं और 105 छात्राओं को साइकिल दे चुके हैं ताकि उनकी पढ़ाई न छूटे।
बोली पत्नी वे बहुत खुश हैं : पूर्व जेसीओ सरदार मोहिंदर सिंह की पत्नी सुमन चौधरी का कहना है कि वे अपने पति से बहुत खुश हैं। उनके सेवा कार्यों की वजह से उन्हें खुशी मिलती है। अच्छा लगता है वे खुशनसीब हैं।
मदद करते रहेंगे : पूर्व जेसीओ सिंह का कहना है कि उनका काम खेतीबाड़ी से चल जाता है। पैसा लेकर कहां जाना है, सब यहीं छोड़ जाना है। इसलिए वे आगे भी शुभ कार्यों के लिए दान करते रहेंगे।
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