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Meerut News: पापा, जल्द ही छुट्टी लेकर घर आ रहा हूं...भैया की शादी की तैयारी करेंगे

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रोहटा। मेजर शुभम सैनी का फाइल फोटो। परिजन
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गौरव शर्मा
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मेरठ। पापा, बहुत जल्द छुट्टी लेकर घर आ रहा हूं। इसके बाद तुषार भईया की शादी की तैयारी करेंगे। ये बातें मेजर शुभम सैनी ने शुक्रवार को अपने पिता से फोन पर कही थीं। 18 फरवरी को शुभम के बड़े भाई तुषार की शादी है। परिवार में खुशी का माहौल है मगर शनिवार दोपहर देहरादून से आई एक कॉल ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। मेजर शुभम की मौत की सूचना मिलने के बाद पिता सत्येंद्र, मां रीता, बहन व अन्य परिजनों का रोकर बुरा हाल हो गया। रिश्तेदार किसी तरह मेजर के परिवार को ढांढस बंधा रहे हैं।



रोहटा रोड स्थित घसौली गांव निवासी सत्येंद्र सैनी आर्मी से सूबेदार के पद से रिटायर्ड हैं। परिवार में शुभम के अलावा अब सत्येंद्र की पत्नी रीता बड़ा बेटा तुषार और एक बेटी है। तुषार नोएडा एक सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर हैं। शुभम सेना में मेजर थे। बेटी आर्मी स्कूल में शिक्षिका है। पिता ने बताया कि शुभम ने 2015 में आर्मी स्कूल से 12वीं की परीक्षा पास की थी। इसके बाद एनडीए में सलेक्शन हो गया था। तीन साल तक पुणे में ट्रेनिंग की थी। पासिंग आउट परेड 2019 में देहरादून में हुई थी। शुभम को पहली पोस्टिंग पंजाब के भटिंडा में मिली थी। तीन साल से शुभम मेजर के पद पर देहरादून के चकराता में तैनात थे।
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शुक्रवार को शुभम ने फोन कर पिता व अन्य परिजनों से बात की थी और जल्द ही छुट्टी लेकर घर आने का वादा किया था लेकिन पिता व भाई रोते हुए बोले कि उन्हें क्या पता था कि वह शुभम से आखिरी बार बात कर रहे हैं। सत्येंद्र ने कहा कि वह तुषार के बाद शुभम के के सिर पर शादी का सेहरा देखने का सपना संजोए थे लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि बेटा तिरंगे में लिपटकर वापस आएगा।
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बचपन से था सेना में जाने का जुनून



पिता सत्येंद्र ने बताया कि शुभम बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था। इसके लिए वह स्कूल के समय से ही पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक व मानसिक रूप से तैयारी करता था। शुभम आर्मी में सेवा देकर देश का मान बढ़ा रहा था। कभी कल्पना भी न की थी कि ऐसा दिन आएगा। तुषार ने नम आंखों से कहा कि उन्हें शुभम की मौत पर यकीन नहीं हो रहा। गांव में भी शोक माहौल व्याप्त है। लोग उनके घर पहुंचकर सांत्वना दे रहे हैं। मेजर शुभम ने आर्मी जॉइन कर गांव का नाम रोशन किया था। वह गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत भी थे। संवाद
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