परतापुर के महरौली गांव में चमगादड़ों के शव मिलने के बाद आसपास गांवों में भी दहशत
मेरठ। आमतौर पर लोग चमगादड़ को अशुभ मानते हैं। कोरोना के बाद ये अब और भी ज्यादा खौफनाक नजर आ रहे हैं। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट का कहना है कि चमगादड़ तो बरसों से इंसान के मित्र रहे हैं। फ्लाइंग फॉक्स यानी फ्रूट बैट जहां फल और फूलों के पौधों के रोपण में हमारी सहायता करते हैं। वहीं, माइक्रो किरोप्टेरा यानी छोटे चमगादड़ हानिकारक कीट-पतंगों, चूहों आदि को नियंत्रित करते हैं। दक्षिण अमेरिका के उष्ण कटिबंधीय वनों में चमगादड़ की कुछ प्रजातियों को छोड़कर बाकी प्रजातियों के चमगादड़ इंसान के मित्र हैं।
चमगादड़ दो तरह के होते हैं। एक वे जो फल-फूल आदि खाते हैं। ये काफी बड़े होते हैं। पेड़ों पर रहते हैं। इन्हें मेगा किरोप्टेरा या फ्लाइंग फॉक्स या फ्रूट बैट कहा जाता है। दूसरे कीट भक्षी छोटे चमगादड़ होते हैं। जिन्हें माइक्रो किरोप्टेरा कहते हैं। ये घरों, पुराने खंडहरों, गुफाओं आदि में रहते हैं। परतापुर के महरौली गांव मेें जिन तीन चमगादड़ों के शव मिले हैं वे फ्रूट बैट ही हैं। ये मांसाहारी नहीं होते। दुनिया भर के वाइल्ड लाइफ साइंटिस्ट तो फ्लाइंग फॉक्स को जंगल का किसान भी कहते हैं। ये फल और फूलों को खाने के बाद परागण में अहम भूमिका निभाते हैं। साइंटिस्ट मानते हैं कि दुनिया भर के जंगलों में इन पेड़ों की संख्या इसी चक्र से बढ़ती है। उष्ण कटिबंधीय वर्षा वनों का बड़ा वनीकरण चमगादड़ों द्वारा फैलाए बीजों से हुआ है।
बरसों से पॉश इलाकों में रहते हैं फ्लाइंग फॉक्स
ग्रामीण जिन चमगादड़ों को बहुत बड़ा बताते हुए विचित्र बोल रहे हैं, उसमें हैरान होने वाली बात नहीं है। फ्रूट बैट इतने ही बड़े होते हैं। शहर के पॉश इलाकों में बरसों से इनका ठिकाना रहा है। सिविल लाइन में एसएसपी आवास हो या फिर सिंचाई विभाग कालोनी, बरसों से यहां पर फ्रूट बैट देखे जाते हैं। ये इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। कैंट में भी फ्रूट बैट की बड़ी संख्या है।
डीएफओ अदिति शर्मा का कहना है कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि चमगादड़ से ही कोरोना फैला है। सरकार ने चमगादड़ को लेकर गाइड लाइन जारी भी नहीं की है। इंडियन मेडिकल काउंसिल की रिसर्च के मुताबिक भी भारत में चमगादड़ की कुछ ही प्रजाति ऐसी हैं जिनमें कोरोना से मिलता-जुलता वायरस है। विश्व में 1100 तो भारत में चमगादड़ों की सौ के करीब प्रजाति हैं। प्रदेश में चमगादड़ की ऐसी कोई प्रजाति नहीं है जिससे कोरोना फैलता हो। लोग डरें नहीं। सैंपल भेजे हैं। जांच में मौत का कारण सामने आ जाएगा।
चमगादड़ों के बारे में ये जानना जरूरी
- दुनियाभर में चमगादड़ों की 11 सौ प्रजाति है और ये हमेशा उल्टा लटक कर सोते हैं।
- फ्रूट बैट की सूंघने की शक्ति इतनी ज्यादा होती है कि रात में हवा के साथ बहती फल की खुशबू को पहचान लेता है।
- चमगादड़ तेज गति की ध्वनि तरंगें निकालते हुए उड़ते हैं। रास्ते में उड़ रहे किसी कीड़े मकोड़े से टकराकर जैसे ही तरंगें उसके एंटिना जैसे तने कानों तक पहुंचती हैं तो उसे पता चल जाता है कि शिकार सामने है। ये एक बाल की हरकत को भी सुनने की क्षमता रखती हैं।
- दुनिया के सबसे बड़े चमगादड़ के पंखों की लंबाई 5 फीट तक होती है।
- ऑस्ट्रेलिया के एथर्टन शहर में स्थित टोल्गा बैट हॉस्पिटल में चमगादड़ों और उनके बच्चों का इलाज किया जाता है।
- चमगादड़ों की सबसे बड़ी गुफा टेक्सास में है। इनमें करीब दो करोड़ चमगादड़ रहते हैं और हर रोज 2 लाख किलो हानिकारक कीट खा जाते हैं।
- चमगादड़ एकलौते स्तनधारी प्राणी है जो उड़ सकते हैं। इसकी उम्र 40 साल तक होती है।
- धरती पर जितनी भी स्तनपायी जीवों की प्रजातियां हैं। उनमें मे 20 प्रतिशत आबादी चमगादड़ों की है।
- बंबलीबी दुनिया का सबसे छोटा चमगादड़ है। यह थाईलैंड में पाया जाता है। इसका वजन मात्र 2.5 ग्राम होता है।
- बिहार के वैशाली जिले के सरसई गांव में चमगादड़ों की पूजा की जाती है।