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जिपं में अध्यक्ष और विपक्ष दोनों की राह मुश्किल

Thu, 16 Mar 2017 01:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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 प्रदेश में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलते ही जिला पंचायत की राजनीति भी गरमा रही है। जिला पंचायत में सत्ता परिवर्तन कराने को लेकर जिला पंचायत सदस्यों का एक धड़ा सक्रिय नजर आ रहा है। अहम बात ये है कि इस सत्ता परिवर्तन की धुरी पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मंनिदरपाल सिंह को बना दिया गया है। तमाम सदस्यों के बीच भाजपाई भी इस परिवर्तन की कमान उनके हाथ में देते हुए सक्रिय हो गए हैं। हालांकि खुलकर कोई चेहरा न होने के कारण भाजपा के लिए भी समीकरण आसान नहीं होंगे। इस पूरे परिदृश्य में जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान और उनके विपक्ष गुट दोनाें की राह ही मुश्किल नजर आ रही है।
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जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव 13 जनवरी को हुआ था। चूंकि विधानसभा चुनाव भी प्रस्तावित थे, ऐसे में प्रदेश सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायतों में अविश्वास के लिए एक साल को विधेयक को दो साल करने का प्रस्ताव विधानसभा में पारित करा लिया। लेकिन विधान परिषद और राज्यपाल के यहां से उस पर अंतिम मुहर नहीं लग पायी। ऐसे में अभी भी एक साल बाद का ही अविश्वास का नियम प्रभावी है।

चुनाव के बाद से ही खिंचे हैं पाले
अध्यक्ष पद पर इस समय सपा नेता अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान निर्वाचित हैं। कांटे के मुकाबले में उन्होंने भाजपा के कुलविंदर सिंह को दो मतों से हराया था। 34 सदस्यों की वोटों में से सीमा प्रधान को 18 और कुलविंदर को 16 वोट मिली थीं। इस चुनाव में सरधना विधायक ठा. संगीत सोम ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़ते हुए कुलविंदर के लिए जमकर काम किया था। सीमा प्रधान के निर्वाचित होने के बाद जिला पंचायत में पाले इस कदर खिंचे कि बैठक में गालीगलौज के बीच मारपीट तक हुई। इसके अलावा भाजपा सदस्यों का आरोप रहा कि बिना बैठक के ही जिलाध्यक्ष ने तमाम प्रस्ताव पारित कर जिला पंचायत बोर्ड बैठक का मजाक बनाकर रख दिया। इसकी शिकायत भी हुई। लेकिन सत्ता के दबाव में अधिकारियों ने कोई काम नहीं किया।
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दो नेताओं के बीच रही रस्साकसी
सीमा प्रधान के जिला पंचायत अध्यक्ष बनने पर अतुल प्रधान ने अधिकांश काम सरधना विधानसभा में ही कराया था। चुनाव देखते हुए दोनों के बीच कई बार रस्साकसी भी हुई। अतुल प्रधान ने जिला पंचायत की आधी से ज्यादा निधि का उपयोग सरधना क्षेत्र में कर डाला और विकास कार्यों से सरधना विधायक को जहां चुनौती दी तो सत्ता के दबाव में थाना और प्रशासन स्तर पर भी परेशानी का कारण बनते रहे।

मौका भुनाने की कवायद में विपक्ष
भाजपा के पूर्ण बहुमत से सत्ता में आने के बाद संगीत सोम ही नहीं बल्कि अतुल प्रधान के तमाम विरोधी इस मौके को हाथ से नहीं देना चाहेंगे। इसके लिए सरगर्मी शुरू हो चुकी है। बताया गया कि मंगलवार को मनिंदरपाल सिंह के यहां कई जिला पंचायत सदस्यों ने जाकर इस मामले में बात की। चौंकाने वाले बात ये रही कि इनमें तीन सदस्य ऐसे भी थे, जिन्होंने अध्यक्ष चुनाव में सीमा प्रधान को वोट किया था। इनके अलावा मुखिया गुर्जर ने भी अपने पुत्र कुलविंदर सिंह को अध्यक्ष बनाने का बीड़ा उठा लिया है। मुखिया गुर्जर ने भी मंनिदरपाल सिंह से संपर्क करते हुए सहयोग मांगा।

अविश्वास पर सहमति, अध्यक्ष कौन बनेगा
सीमा प्रधान को अध्यक्ष पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव आना तो संभावित नजर आ रहा है। ऐसे में अहम सवाल यह है कि अध्यक्ष कौन बनेगा? इस पर आम सहमति बनना फिलहाल मुश्किल है। क्योंकि इस सवा साल में तमाम उतार-चढ़ाव के बीच बदली राजनीति ने कुलविंदर सिंह को भी पीछे कर दिया है। कुलविंदर को चुनाव लड़ाने वाले कुछ नेता और सदस्य अब उनके ही विरोध में बात करते नजर आ रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि विपक्ष अविश्वास के साथ अपना नेता किसे चुनेगा। यही सवाल विपक्ष की एकजुटता पर सवाल उठा रहा है। 

अध्यक्ष के सामने भी चुनौती
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में अतुल प्रधान और मंत्री शाहिद मंजूर खेमे में तनातनी हो गई थी। शाहिद मंजूर खेमे में की उस दौर की टीस भी सीमा प्रधान और उनके पति अतुल प्रधान की मुसीबतें बढ़ा सकती है। ऐसे में अपनी ही पार्टी में निर्वाचित सदस्यों को अब बदले माहौल में संभालना और अविश्वास को चुनौती देना अतुल प्रधान और उनकी पत्नी जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा प्रधान के सामने मुश्किल भरा नजर आ रहा है।

ये है जातिगत आंकड़ा
34 जिला पंचायत सदस्यों में इस समय समय दस गुर्जर, पांच ठाकुर, पांच जाट, चार मुस्लिम, एक प्रजापति, छह दलित, एक खटीक, एक वाल्मीकि और एक गुसाई जाति से है।
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