विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद बुधवार को पहली बार बसपा सुप्रीमो मायावती ने सभी प्रत्याशियों की लखनऊ में बैठक ली। उन्होंने आरोप लगाया कि ईवीएम की गड़बड़ी से इस चुनाव में भाजपा को फायदा हुआ है, तो ऐेसे में हर माह कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन होगा। खासतौर पर मेरठ की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि मेरठ में तो कई सीटों पर बेहद उम्मीद थी।
लेकिन फिर यह क्या हुआ?
मायावती ने बैठक में सभी की समीक्षा तो की ही। लेकिन साथ ही कहा कि बसपा की उम्मीदों को ईवीएम ने तोड़ा है। उन्होंने मेरठ की समीक्षा में कहा कि जिन सीटों पर दलित-मुस्लिम का बेहतर समीकरण बना हुआ था, वहां का परिणाम भी खराब ही रहा है। जहां अन्य सोशल इंजीनियरिंग थी, वहां भी परिणाम सही नहीं आया। इस पर अपने स्तर से मंथन भी करना होगा। खासतौर से मेरठ की कई सीटों पर बेहद उम्मीद थी। इसके अलावा उन्होंने ईवीएम के खिलाफ हर माह कलक्ट्रेट मुख्यालय पर प्रदर्शन कर आवाज उठाने की बात कही।
तलाशो ऐसे लोग जो साथ आएं
बैठक में इस बाबत कहा गया कि ऐसे लोग भी तलाशे जाएं, जो यह कह रहे हैं कि उनके यहां से भाजपा को वोट नहीं दिया गया था। लेकिन काउंटिंग में ऐसे वोट पाए गए। कुछ लोग खुद ही सामने आ रहे हैं, तो उन्हें सपोर्ट किया जाए। उन्होंने मेरठ की सभी सातों सीटों की विस्तृत समीक्षा करते हुए कहा कि जहां ज्यादा वोट मिलने की उम्मीद थी, वहां फिर से उम्मीदवार जाकर लोगों से संपर्क करें। देखें कि वास्तव में क्या हुआ है।