विधानसभा चुनाव में प्रत्येक दल द्वारा बाहरी प्रत्याशी उतारने को लेकर राष्ट्रीय वीर गुर्जर महासभा द्वारा रविवार को पंचायत आयोजित की गई। इसमें बखेड़ा हो गया।
बसपा सुप्रीमो मायावती पर गलत टिकट देने के आरोप लगाए गए तो दलित समाज के लोग उखड़ गए। वे पंचायत छोड़कर चले गए। हालांकि, बाद में इस बाबत उन्हें समझाने का प्रयास किया पर वे नहीं माने।
विधानसभा और लोकसभा चुनाव में प्रत्येक दल द्वारा बाहरी प्रत्याशी पर दांव लगाने की बात कहकर हापुड़ रोड स्थित गांव धनौटा में लोहिया फार्म हाउस के सामने पंचायत बुलाई गई थी। राष्ट्रीय वीर गुर्जर महासभा ने इसका आह्वान किया था और यह सर्वदलीय पंचायत थी।
इसमें गुर्जरों के अलावा अन्य बिरादरी के लोग भी पहुंचे। राष्ट्रीय वीर गुर्जर महासभा के महासचिव सत्यवीर गुर्जर ने कहा कि प्रत्येक पार्टी तथा दल विधानसभा या लोकसभा चुनाव में बाहरी प्रत्याशी थोपने का प्रयास करते हैं। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विनय प्रधान ने बताया कि बाहरी प्रत्याशी थोपना सही नहीं है।
भाजपा के युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष रोबिन गुर्जर, रालोद के युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष विजेंद्र भाटी ने भी कहा कि क्षेत्रीय उम्मीदवार ही बेहतर होता है और बाहरी का तो विरोध होना चाहिए।
पंचायत में नीरजपाल, ब्रजवीर प्रमुख, महावीर भड़ाना, राजपाल धनतला, अशोक पोसवाल, राजेश्वर छतरी, संदीप फफूंडा, राजेश कसाना, अंकित मावी, संजय खासपुर, अरुण नागर, जगदीश, लव कसाना, कैलाश प्रधान, करतार सिंह, सोनू, कल्याण सिंह, जयपाल सिंह आदि मौजूद रहे।
बसपा की पंचायत बताकर बुलाए थे लोग
बताया गया कि सत्यवीर गुर्जर और पूर्व जिला पंचायत सदस्य रविंद्र गुर्जर ने बसपा की पंचायत बताकर लोगों को इकट्ठा किया था। जबकि इसमें गुर्जर समाज सहित, दलित, त्यागी, ब्राह्मण सहित सभी समाज के लोग पहुंचे थे।
पंचायत में कई वक्ताओं ने अप्रत्यक्ष रूप से बसपा सुप्रीमो पर विधानसभा चुनाव में गलत प्रत्याशी उतारने का आरोप लगा दिया। रागिनी गायक ने रागिनी में इस बात का सीधा सीधा जिक्र कर दिया। इसके लेकर बखेड़ा हो गया। बसपा समर्थकों ने माइक छीन लिया और विरोध जताया। लोग पंचायत छोड़कर जाने लगे। उन्हें रोका गया, लेकिन काफी लोग वहां से चले गए।
माफी मांगी
बाद में सत्यवीर गुर्जर ने वक्ताओं की ओर से माफी मांगी तथा रागनी गायक से भी माफी मंगवाई गई। बाद में मामला इतना बिगड़ा कि आयोजकों की गाड़ी से आये बसपा समर्थित लोग बाद में अपने किराए से ही लौटे।
इस बीच जब दलित समाज के लोग पंचायत से उठकर चल दिए तो गुर्जर समाज के एक वक्ता ने दलित समाज के लोगों को खुले मंच से फिर उग्र तेवर दिखाए। कहा कि दलितों की तरह गुर्जर समाज भी अपना एक नेता चुन ले।
वर्जन
रागिनी गायक या वक्ताओं ने केवल यह कहा था कि बसपा सुप्रीमो मायावती को भी स्थानीय नेताओं को ही चुनाव में टिकट देना चाहिए। यह आह्वान सभी दलों के लिए था। इससे कुछ गलतफहमी हो गई थी। बाद में सब ठीक हो गया। यह पंचायत केवल गुर्जरों की नहीं बल्कि सभी वर्ग के लोगों की थी।
-रविंद्र गुर्जर, पूर्व जिलापंचायत सदस्य