- किसान बोले- पहले रडार और हाईवे से घटी जमीन, अब चकबंदी से बढ़ेगी मुश्किल
- नक्शा-5 निरस्त कर निष्पक्ष जांच की मांग, समाधान नहीं तो गांव में नहीं घुसने देंगे चकबंदी अधिकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। गांव दबथुवा में बुधवार को चकबंदी प्रक्रिया के विरोध में किसानों और ग्रामीणों की पंचायत हुई। पंचायत में किसानों ने चकबंदी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नक्शा-5 को निरस्त करने और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो चकबंदी अधिकारियों और कर्मचारियों का गांव में प्रवेश रोक दिया जाएगा तथा आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
पंचायत में किसानों ने कहा कि गांव की कृषि भूमि पहले ही सैन्य रडार परियोजना और हाईवे निर्माण के कारण प्रभावित हो चुकी है। इन परियोजनाओं में काफी कृषि भूमि अधिग्रहित होने से किसानों की जोत का रकबा कम हो गया है। अब चकबंदी प्रक्रिया में अनियमितताओं के चलते बची हुई भूमि पर भी किसानों के हित प्रभावित होने की आशंका है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट गहरा सकता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि तैयार किए गए नक्शा-5 में कई विसंगतियां हैं। कई किसानों के खेतों का मौके पर निरीक्षण किए बिना ही मूल्यांकन कर दिया गया, जबकि किसानों की ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों का भी समुचित निस्तारण नहीं किया गया। उनका कहना है कि यदि इसी आधार पर चकबंदी लागू की गई तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और खेतों की उपयोगिता भी प्रभावित होगी।
पंचायत में सर्वसम्मति से मांग की गई कि नक्शा-5 को तत्काल निरस्त कर चकबंदी की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जाए और किसानों की आपत्तियों का मौके पर सत्यापन कर उनका निस्तारण किया जाए। यदि समस्या को गंभीरता से नहीं लिया तो चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। पंचायत के बाद किसानों ने उपजिलाधिकारी के नाम ज्ञापन भेजकर निष्पक्ष जांच, किसानों की आपत्तियों के निस्तारण और चकबंदी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। पंचायत की अध्यक्षता प्रधानपति हरेंद्र सिंह उर्फ मलूक ने की।
महापंचायत में विजयपाल, अरुण, सुरेंद्र सिंह, रविंद्र सिंह, धर्मवीर सिंह, जितेंद्र कुमार, सुनील कुमार, अभिषेक, आशीष चौधरी, आकाश, नीरज, सेंसरपाल, विक्रम सिंह, सुनील, जय सिंह, महावीर सहित आदि मौजूद रहे।