स्वास्थ्य विभाग और स्कूल प्रबंधन की घोर लापरवाही से बुधवार को मासूमों की जान पर बन आई। भावनपुर के राली चौहान गांव स्थित पूर्व माध्यमिक स्कूल में आयरन की गोलियां खाने से 70 से ज्यादा बच्चों की हालत बिगड़ गई। खाली पेट ही दूध के साथ सेवन करने से इन गोलियों ने ताकत के बजाए जहर बनाने का काम किया।
सिरदर्द और उल्टी के बाद बच्चे चक्कर खाकर बेहोश होकर गिरने शुरू हुए तो कुछ बच्चों को सीएचसी तो कुछ को घर भेज दिया गया। कई बच्चे रास्ते में बेहोश हो गए। कई की हालत घर जाकर खराब हुई। सूचना पर पहुंचे अभिभावकों ने कार्यवाहक प्रधानाचार्य को जमकर धुन दिया। कई घंटे तड़पने के बाद बच्चों को सीएचसी भावनपुर से मेडिकल कॉलेज रेफर कर इलाज दिया गया।
विद्यालय में बुधवार को करीब 114 बच्चे उपस्थित थे। स्कूल हेल्थ प्रोग्राम के तहत बच्चों को सुबह करीब 11 बजे शिक्षकों ने आयरन की गोलियां दे दीं। दूध पीने के बाद अधिकांश बच्चों ने आयरन की गोली खा लीं। बच्चे खाली पेट थे और दूध के साथ गोलियों के सेवन से उनकी हालत बिगड़नी शुरू हो गई। बच्चे गैस बनने, सिर दर्द और चक्कर आने की शिकायत के बीच उल्टी करने लगे। शिक्षकों ने पहले तो कोई ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब कई बच्चे उल्टी के साथ चक्कर खाकर गिरने लगे तो कुछ बच्चों को सीएचसी भावनपुर भेज दिया गया।
जबकि कार्यवाहक प्रधानाचार्य ने अभिभावकों को कोई जानकारी नहीं दी। उधर, बाकी बच्चों को दोपहर साढ़े बारह बजे के आसपास घर भेज दिया गया। कुछ बच्चे रास्ते में बेहोश होकर गिर गए तो कुछ बच्चों की हालत घर पहुंचने के बाद ज्यादा बिगड़ गई।
परिजन बच्चों को लेकर सीएचसी पहुंचे तो वहां पर पहले से बच्चों का ट्रीटमेंट होते देख उनका पारा चढ़ गया। गुस्साए परिजनों ने कार्यवाहक प्रधानाचार्य गुलाम अब्बास की पिटाई कर दी। पुलिस ने किसी तरह मामला शांत किया। बच्चों को दोपहर करीब दो बजे सीएचसी से मेडिकल कॉलेज लाया गया। जहां करीब तीन घंटे के ट्रीटमेंट के बाद बच्चों की स्थिति सामान्य हुई।