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हालात कह रहे, खिचड़ी तो पक रही थी

Sun, 03 Jan 2016 01:28 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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तमाम नेताओं के बयान और हालात इस तरफ इशारा कर रहे हैं कि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव के मद्देनजर राजेंद्र शर्मा के आवास में खिचड़ी जरूर पक रही थी। ऐसे कई अहम सवाल उठ रहे हैं जो इस चर्चा को मजबूती दे रहे हैं। जैसे मंत्री शाहिद मंजूर कांग्रेस नेता के आवास में नहीं थे तो इतना ड्रामा क्यों हुआ?
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पूरे घटनाक्रम में बड़ा सवाल यही है कि जब शाहिद मंजूर अंदर नहीं थे तो अपराह्न तीन बजे सपाइयों की गाड़ियों का काफिला राजेंद्र शर्मा के आवास पर क्यों पहुंचा। इस काफिले से मंत्री के करीबी कहे जाने वाले अम्हैड़ा निवासी विवेक सिवाच की जायलो गाड़ी राजेंद्र शर्मा के आवास के भीतर घुसी और तीर की तरह यहां से क्यों भागी? पथराव होने पर भी यह गाड़ी क्यों नहीं रोकी गई? इन गाड़ियों में कुछ लोग मंत्री के बेहद नजदीकी बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि एक गाड़ी को मंत्री का ही ड्राइवर चला रहा था।

यह है विरोधाभास
दिनभर चले घटनाक्रम के बाद मंत्री का का कहना है कि उनकी तबीयत खराब थी। इसलिए वे दवा लेकर सो गए और किसी से बात नहीं की। ऐसे में उनके घर के लोगों को तो यह बात साफ ही होगी कि मंत्री जी भीतर हैं। राजेंद्र शर्मा का कहना है, जब यह चर्चा उड़ी कि मंत्री घंटों से मेरे मकान में हैं और फोन भी नहीं उठा रहे हैं तो उनके समर्थक और परिवार के कुछ लोग ढूंढ़ते हुए गाड़ियों के काफिले के साथ मेरे आवास पर पहुंच गए। अब यह सवाल उठता है कि उनके समर्थकों और परिजनों ने यह नहीं देखा कि मंत्री घर में दवाई लेकर सो रहे हैं। वे सीधे राजेंद्र शर्मा के आवास की तरफ कूच कर गए। यहां बेतहाशा ढंग से गाड़ी दौड़ाई।
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और वो बेचैनी भी
अन्य घटनाक्रम भी संदेह को पुष्ट करते रहे। कांग्रेस नेता राजेंद्र का कहना था कि उन्हें एक रिश्तेदारी में जाना था, पर मीडिया का जमावड़ा देखकर वह नहीं गए। बार-बार कभी भीतर तो कभी बाहर आते। उनकी बेचैनी भी साफ बता रही थी कि कुछ न कुछ तो गड़बड़ जरूर है।
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