जिला पंचायत के वार्डों का आरक्षण सोमवार देर रात तक भी पहेली बना रहा। सूची के इंतजार में रात आंखों में कटी। ऐसा नहीं कि आरक्षण सूची तैयार नहीं थी। चार दिन पहले आरक्षण सूची तैयार होने के बावजूद इसका प्रकाशन न होना जहां तमाम सवाल खड़े कर रहा है। वहीं, विपक्ष के साथ ही सत्ता पक्ष के लोग भी इसे लेकर तमाम आशंकाएं जता रहे हैं।
जिला पंचायत वार्ड आरक्षण की सूची 30 अगस्त को ही तैयार हो चुकी थी। लेकिन बाद में ओबीसी आरक्षण के लिए जनसंख्या आधार होने के चलते इसे नए सिरे से तैयार किया गया। ऐसे में यह सूची भी डीपीआरओ स्तर से दो सितंबर को तैयार हो गई थी। बावजूद इसके, क्षेत्र पंचायत प्रमुख की आरक्षण सूची जहां रविवार देर रात जिलाधिकारी ने जारी कर दी, वहीं जिला पंचायत वार्ड आरक्षण की सूची सोमवार देर रात तक भी जारी नहीं हो सकी। जबकि सबकी निगाहें इस पर लगी रहीं।
दिग्गजों की रस्साकशी में फंसा आरक्षण
जिला पंचायत चुनाव को लेकर शुरू से ही चर्चा है कि कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर अपने बेटे नवाजिश मंजूर को जिला पंचायत अध्यक्ष बनाना चाहते हैं। ऐसे में उनका प्रयास है कि शासन स्तर से जिला पंचायत अध्यक्ष पद अनारक्षित हो। यही नहीं, एमएलसी डॉ. सरोजनी अग्रवाल भी इसी पक्ष में हैं। लेकिन वह अपने परिवार के सदस्य को जिला पंचायत अध्यक्ष के रुप में देखना चाहती हैं। इसी रस्साकशी में जिला पंचायत वार्ड का आरक्षण अटका हुआ है।
नियमावली में उलझे समीकरण
रविवार को चर्चा रही कि कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर के इशारे पर आरक्षण सूची तैयार हो रही है। वहीं, सोमवार को सुनने में आया कि जिला पंचायत वार्ड आरक्षण की नियमावली के चलते शाहिद मंजूर ही नहीं, बल्कि उनके पूरे गुट को भारी झटका लगा है। उनके पुत्र नवाजिश मंजूर जोकि वार्ड 31 से चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं, वह वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित हो रहा है। इसके अलावा उनके करीबी हाजी जुल्फी, हाजी आरिफ और इंतजार ललियाना आदि तमाम दावेदार ऐसे हैं जो आरक्षण के चलते बाहर हो रहे हैं। ऐसे में दबाव के कारण आरक्षण सूची अटकी हुई है। चूंकि शाहिद मंजूर चाहते हैं कि वार्ड 31 के साथ ही उनके खास लोगों का वार्ड भी उनके अनुसार ही सुरक्षित रहे। लेकिन नियमों के आड़े आने के कारण मामला अटका हुआ है। तमाम दबाव के बावजूद प्रशासनिक हलका इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं है। वहीं, एक गुट का कहना है कि डॉ. सरोजनी अग्रवाल कैबिनेट मंत्री आजम खां की करीबी होने के कारण इस बार शाहिद मंजूर पर भारी पड़ रही हैं।
वर्चस्व की लड़ाई में जिला हलकान
सत्ता के इन दोनों दिग्गजों की जंग में नतीजा कुछ भी रहे, लेकिन सोमवार देर रात तक पूरा जिला आरक्षण को लेकर हलकान रहा। तमाम दावेदार ऐसे रहे जो आधी रात तक अखबारों के दफ्तरों और मीडिया कर्मियों को फोन करके आरक्षण की सूची पर जानकारी लेने में जुटे रहे।
सूची तैयार तो अंतिम समय में ही जारी क्यों
अफवाहों और चर्चाओं को बल इस बात से ज्यादा मिल रहा है कि जब आरक्षण सूची दो सितंबर को ही तैयार हो चुकी है तो इसे अंतिम दिन ही जारी क्याें किया जा रहा है। जबकि गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत आदि तमाम जनपद ऐसे हैं जहां पर सोमवार तक सभी ने अपने यहां की जिला पंचायत के वार्डों की आरक्षण सूची जारी कर दी। लेकिन मेरठ में इसे लेकर देर रात तक मंथन चलता रहा।
कोट
दबाव जैसी कोई बात नहीं है। कुछ तकनीकी खामियों के कारण आरक्षण तैयार करने में देरी हुई है। लेकिन शासन से छह से आठ सितंबर तक का समय दिया गया है। इसलिए अनंतिम सूची मंगलवार दोपहर तक जारी कर दी जाएगी। आरक्षण में किसी प्रकार का पक्षपात या नियमों का उल्लंघन नहीं किया जाएगा।- पंकज यादव, डीएम