आरक्षण को लेकर लगाए जा रहे कयास और गणित पूरी तरह फेल साबित हुए। ब्लॉक प्रमुख के लिए जारी आरक्षण पर गौर करें तो चक्रानुक्रम कहीं भी नजर नहीं आ रहा है। यही नहीं, जातीय आधार को भी यदि शामिल करके देखें तो वह भी इस बार आरक्षण में किसी न किसी सीट से गायब है। ऐसे में आरक्षण में नियमों से ज्यादा दबाव का गणित नजर आ रहा है।
मेरठ ब्लॉक की सीट पिछली बार भी अनारक्षित थी और इस बार भी। जबकि, इस सीट पर पिछड़ी जाती के वोट 50 फीसदी से अधिक हैं। यहां पर सिर्फ 1995 और 2005 में पिछड़ी जाति की महिला के लिए सीट आरक्षित हुई थी। ऐसे में उम्मीद थी कि इस बार सीट पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित होगी। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं।
जानी खुर्द सीट में भी पिछड़ा वर्ग पचास फीसदी से ज्यादा है। यह सीट पिछली बार पिछड़ी जाति की महिला के लिए आरक्षित थी और इस बार अनारक्षित है। जबकि, पिछड़ा वर्ग पुरुष के लिए आज तक आरक्षित नहीं हुई है। रजपुरा ब्लॉक में अनुसूचित जाति की संख्या सबसे कम और पिछड़ा वर्ग सबसे ज्यादा है। यह सीट भी आज तक पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित नहीं हुई है। अब इस बार इस सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया है। जबकि, यह सीट दो बार अनारक्षित, एक बार सामान्य जाति की महिला और एक बार अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रह चुकी है।
खरखौदा ब्लॉक को महिला के लिए आरक्षित किया गया है। यहां का आरक्षण चक्रानुक्रम और आरक्षण गणित के हिसाब से ही होने की बात कही जा रही है। यही स्थिति रोहटा, सरधना और सरूरपुर ब्लॉक की भी है। दौराला ब्लॉक में पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या कुल जनसंख्या की 60 फीसदी से ज्यादा है। बावजूद इसके यहां ब्लॉक प्रमुख का पद अनारक्षित किया गया है। पूर्व के आरक्षण चार्ट पर नजर डालें तो एक बार भी यह सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित नहीं हुई है। यहां वर्ष-2005 में सिर्फ एक बार पिछड़ा वर्ग की महिला को मौका दिया गया था।
मवाना ब्लॉक में सामान्य जाति की जनसंख्या सबसे कम है। बावजूद इसके लगातार दूसरी बार इस सीट को अनारिक्षत रखना गले नहीं उतर रहा है। माछरा में सामान्य और पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या लगभग बराबर है। फिर भी इस सीट को इस बार पिछड़ी जाति की महिला के लिए आरक्षित किया गया है। जबकि, आज तक एक भी बार यह सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित नहीं हुई थी। परीक्षितगढ़ और हस्तिनापुर के आरक्षण को सही माना जा रहा है। ऐसे में आरक्षण को चक्रानुक्रम और जातीय गणित के आधार पर बांटने का दावा कहीं न कहीं खोखला नजर आ रहा है।