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पंचायत चुनाव 2021: इस बार भाजपा-रालोद की 'परीक्षा', समझिए क्या है पूरा गणित

Wed, 14 Apr 2021 01:38 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, अनुज मित्तल, मेरठ

सार

किसान आंदोलन के बीच मेरठ की पंचायत राजनीति से अगले विधानसभा चुनाव की जमीन तैयार हो रही है।
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पंचायत चुनाव। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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किसान आंदोलन के बीच मेरठ की पंचायत राजनीति से अगले विधानसभा चुनाव की जमीन तैयार हो रही है। मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा और रालोद के लिए पंचायत चुनाव किसी परीक्षा से कम नहीं हैं। दरअसल, किसान आंदोलन के जरिए रालोद पार्टी अपना खोया जनाधार फिर से हासिल करने की कवायद में जुटी है, तो भाजपा को अपनी जमीन बचाने की फिक्र है। हालांकि इनके बीच सपा-बसपा पर भी सबकी नजर है।

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2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से भाजपा ने यूपी और खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक में तस्वीर बदल दी है। कभी पश्चिम में रालोद की तूती बोलती थी। सपा और बसपा भी दमदार थी। मुजफ्फरनगर दंगों के बाद लोकसभा चुनाव में जाति और मुद्दों के बजाय सांप्रदायिक ध्रुवीकरण हो गया। 2017 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव में भी हालात कमोवेश ऐसे ही रहे। नतीजन, रालोद मुखिया चौ. अजित सिंह और उनके पुत्र जयंत चौधरी को हार का सामना करना पड़ा। 

अब किसान आंदोलन के बाद से बदली तस्वीर का फायदा रालोद उठाना चाहता है। यही कारण है कि कृषि कानूनों के विरोध में किसान महापंचायतें कर जयंत चौधरी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लगभग सभी इलाकों को मथ डाला। जाट बहुल इलाकों में इसका असर दिख रहा है। पंचायत चुनाव को 2022 के विधानसभा चुनाव का ट्रायल माना जा रहा है। सिवालखास विधानसभा क्षेत्र की सभी सीट अनारक्षित हैं। बावजूद इसके वार्ड 14 को छोड़कर बाकी पर भाजपा ने जाट प्रत्याशी उतारे हैं। कारण साफ है कि जाट मतदाता यहां किसान आंदोलन के तहत भाजपा से कटेंगे। ऐसे में जाट प्रत्याशी जाट वोटों में सेंधमारी करेगा, तो अन्य बहुसंख्यक वोट भाजपा को मिलेंगे। भाजपा ने अन्य सीटों पर भी जातीय गणित का ध्यान रखा है।
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रालोद ने मुस्लिम प्रत्याशियों पर ज्यादा भरोसा जताया है। रालोद को उम्मीद है कि जाट वोट तो उसका है ही, मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारने से मुस्लिम और जाट वोट मिलकर जीत की राह तय करेंगे। रालोद ने अभी 22 वार्ड में प्रत्याशी तय किए हैं, जिसमें मुस्लिम नौ, जाट पांच, अनुसूचित जाति से पांच हैं। एक खटीक, एक-एक ठाकुर और त्यागी बिरादरी से प्रत्याशी है।  

बसपा का दलित, गुर्जर और मुस्लिमों पर दांव
सपा ने मुस्लिम और गुर्जर कार्ड ज्यादा खेला है, जबकि बसपा ने दलित, गुर्जर के साथ मुस्लिम कार्ड चला है। कांग्रेस भी मुस्लिम और गुर्जर बिरादरी पर ज्यादा दांव लगा रही है। 

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सपा-रालोद ने की भाजपा प्रत्याशियों की घेराबंदी
जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की घेराबंदी के लिए सपा-रालोद और भाकियू एकजुट हो गए हैं। सपा और रालोद ने वरिष्ठ भाजपा नेता यशपाल पंवार, वीरपाल निर्वाल, सतेंद्र दीवान और अर्जुन तोमर को कड़ी टक्कर देने की रणनीति बनाई है। चुनाव मैदान में जहां सपा समर्थित प्रत्याशी है, वहां रालोद ने समर्थन कर दिया है। वहीं, रालोद समर्थित प्रत्याशी का सपा ने समर्थन कर दिया है। जिला पंचायत के जानसठ क्षेत्र के वार्ड 33 पर भाजपा के वरिष्ठ नेता यशपाल पंवार चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर सपा ने शिव कुमार सैनी को प्रत्याशी बनाया है। रालोद अध्यक्ष अजीत राठी ने पत्र जारी कर यहां सपा को समर्थन कर दिया है। यशपाल पंवार की घेराबंदी की जा रही है कि उन्हें वार्ड चुनाव में ही आगे बढ़ने से रोका जा सके। वार्ड 42 से भाजपा के वरिष्ठ नेता वीर पाल निर्वाल चुनाव लड़ रहे हैं।

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