आतंकी गतिविधियों के मद्देनजर प्रदेश के सर्वाधिक संवेदनशील जनपदों में शामिल सहारनपुर में बड़ी संख्या में विदेशी परिवारों के रहने का खुलासा हुआ है। इससे खुफिया एवं पुलिस विभाग में खलबली मच गई है। अब तक म्यांमार निवासी करीब पचास से ज्यादा परिवारों के जनपद में रहने की पुष्टि हो चुकी है। खुफिया विभाग उनके वैध अथवा अवैध होने की जांच में जुटा है।
22 जुलाई को गंगोह के स्लाटर हाउस में काम करने वाले एक युवक ने कोतवाली पहुंचकर बताया कि वह म्यांमार के जिले मुंडुल में थाना बागिदान के लांबा का रहने वाला है। उसने अपना नाम शैफुल कलाम पुत्र अब्दुल कलाम बताया। उसने पुलिस को बताया कि वह पिछले काफी समय से गंगोह के स्लाटर हाउस में पशु कटान का काम करता आ रहा है। उसने आरोप लगाया कि यहां उससे जबरन हफ्ता वसूली की जा रही है। नगर में म्यांमार निवासी युवक के होने का पता चलते ही पुलिस और खुफिया विभाग अलर्ट हो गए थे। युवक ने खुद को शरणार्थी बताते हुए युनाइटेड नेशन का कार्ड भी दिखाया था।
कोतवाल राकेश सिंह ने बताया कि जांच में पता चला की गंगोह में करीब पांच लोग एवं जनपद सहारनपुर में म्यांमार के करीब पचास परिवार रह रहे हैं। इनमें से कुछ के पास शरणार्थी कार्ड हैं, जबकि कुछ ने कार्ड अप्लाई किया हुआ है। कोतवाली प्रभारी ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराते हुए एलआईयू को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। एलआईयू मामले की गहनता से पड़ताल कर रही है। युनाइटेड नेशन से भी उक्त लोगों के बारे में जानकारी की जाएगी। एसएसपी बबलू कुमार का कहना है कि मामला बेहद संजीदा है और इसकी जांच की जा रही है।
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