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कोरोना छोड़िए, दूसरे रोगियों को भी नहीं मिल रहा इलाज

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कोरोना छोड़िए, दूसरे रोगियों को भी नहीं मिल रहा इलाज
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मेरठ। कोरोना तो छोड़िए, अन्य रोगियों को भी अब आसानी से इलाज नहीं मिल रहा है। जरूरतमंद रोगी को किसी भी अस्पताल में ऑक्सीजन वाला बेड नहीं मिल रहा है। परिजन अस्पतालों के बाहर मिन्नतें कर रहे हैं। अस्पताल कर्मचारियों के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ा रहे हैं कि उनके अपनों को बचा लें, लेकिन किसी की नहीं सुनी जा रही है। मेडिकल अफसर ऑक्सीजन पर्याप्त होने का दावा कर रहे हैं, वहीं, गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन की कमी बताकर लौटाया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार दोपहर कंकरखेड़ा से परिजन महिला को एंबुलेंस में लेकर इमरजेंसी पहुंचे। महिला को फेफड़ों में संक्रमण था। परिजनों ने इमरजेंसी में भर्ती के लिए कहा तो कर्मचारियों ने इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन बेड नहीं मिल पाएगा। आधे घंटे तक परिजन मिन्नतें करते रहे, बेड नहीं मिला। निराश परिजन महिला को लेकर चले गए।
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हाथ जोड़े, मिन्नतें कीं, फिर भी नहीं किया भर्ती
- मुजफ्फरनगर जाट कालोनी निवासी रिषभ की बुआ के फेफड़ों में संक्रमण से हालत बिगड़ गई। परिवार वाले मेरठ मेडिकल कॉलेज पहुंचे। परिजनों ने बताया कि कोरोना रिपोर्ट निगेटिव है। फेफड़ों में संक्रमण है। भर्ती कर लीजिए। कर्मचारियों ने कहा ये गंभीर हैं। इनके लिए बेड नहीं है। रिषभ हाथ जोड़ते रहे, लेकिन भर्ती नहीं किया गया। घंटों दूसरे अस्पतालों में भटकने के बाद एक एक निजी अस्पताल में बेड मिला।
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रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए भटक रहे लोग
- दिल्ली के सुशील अग्रवाल को कोरोना संक्रमण होने पर दिल्ली और गाजियाबाद में कहीं भी बेड नहीं मिला। किसी के बताने पर परिजन मेरठ आ गए। यहां पर संतोष अस्पताल में भर्ती करा दिया। सुशील अग्रवाल की हालत बिगड़ने पर अस्पताल कर्मचारियों ने कहा कि इनको रेमडेसिविर इंजेेक्शन लगाना होगा। सुबह से रात तक सुशील अग्रवाल की बेटी मेडिकल स्टोर के चक्कर लगाती रहीं। सोशल साइट पर लोगों से इंजेक्शन मुहैया कराने की मदद मांगती रही, लेकिन शाम तक भी इंजेक्शन नहीं मिला।
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कोविड कंट्रोल रूम पर सिर्फ फोन सुन रहे
- दिल्ली की एक महिला कई दिन से कोरोना संक्रमण होने के बाद हापुड़ रोड स्थित अस्पताल में भर्ती है। बृहस्पतिवार को अस्पताल के कर्मचारियों ने परिजनों को बुलाकर कहा कि ऑक्सीजन की कमी है, ऐसे में आप दूसरी जगह इंतजाम कर लीजिए। परिजनों ने कोविड कंट्रोल रूम के फोन नंबर 01212668470 पर फोन करके मरीज को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने की गुहार लगाई तो वहां से जवाब मिला कि दिखवा रहे हैं। महिला की बेटी ने तीन बार फोन किया तो यही जवाब मिला कि आपके नंबर पर बताते हैं। इसके बाद युवती के फोन पर कोई जवाब नहीं आया। गनीमत रही कि अस्पताल में ऑक्सीजन पहुंच गई और महिला को दूसरी जगह भर्ती नहीं करना पड़ा।
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कोविड वार्ड में बेटे संग भेजने की जिद करते रहे माता-पिता
मेरठ। बिजनौर के झर्रा गांव के रहूप और उनकी बीवी शमीमा की हालत देखक हर किसी की आंखें नम हो गईं। उनका नौ साल का बेटा अर्सलान स्ट्रेचर पर कराह रहा था। रहूप और शमीमा मेडिकल कर्मचारियों से हाथ जोड़कर कह रहे थे कि उन्हें बेटे के साथ कोविड वार्ड में रहने दें। कर्मचारियों ने कहा कि कोविड वार्ड में तीमारदार नहीं रह सकता।
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रहूप ने बताया कि तीन दिन पहले गांव में एक कार ने बेटे को टक्कर मार दी। उसके सिर और कूल्हे में फ्रेक्चर हो गया। उसे यहां पर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, लेकिन सुबह उसकी कोरोना रिपोर्ट पॉजीटिव आ गई। इसके बाद उसे कोविड वार्ड में शिफ्ट किया गया।
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