सूरजकुंड श्मशान : हर तरफ चिताओं का मंजर देख सहम गए दिल
मेरठ। हर तरफ चिताएं जल रही हैं। एक चिता की आग ठंडी भी नहीं हो रही और दूसरा शव क्रिया के लिए पहुंच रहा है। प्लेटफार्म तो छोड़िए अब जमीन पर भी शवों को जलाना पड़ रहा है। सूरजकुंड श्मशान घाट का यह मंजर देखकर हर किसी का दिल सहम गया।
यहां मौजूद लोग भगवान से यही प्रार्थना करते रहे कि ऐसे दृश्य दोबारा कभी देखने को न मिले। शुक्रवार सुबह से आधी रात तक यहां यही क्रम जारी रहा। कोविड वाले शवों को आचार्य और अन्य कर्मचारी उठा रहे थे। वे दूर खड़े होकर सिर्फ इस बात का इंतजार में थे कि कब चिता पर शव को रखा जाए और वे दाह संस्कार पूर्ण करें।
शहर में कोविड और साधारण मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार रात तक सूरजकुंड श्मशान घाट में 21 कोविड वालों सहित 47 शवों का अंतिम संस्कार किया गया। इनके अलावा 18 शवों को हरिद्वार ले जाया गया। इस तरह कुल 65 मौतें हुईं। गंगा मोटर कमेटी के पदाधिकारियों ने बताया कि हरिद्वार ले जाए गए शवों में नौ को उनके परिजन ले गए हैं। इसके अतिरिक्त नौ अन्य अन्य माध्यमों से भेजे गए। हर दिन शवों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हिंदू धर्म के अनुसार शव का जमीन पर अंतिम संस्कार नहीं किया जाता है, लेकिन कोविड ने सभी परिस्थितियों को बदल दिया है। अब अंतिम संस्कार कराने वाले आचार्य भी डरने लगे हैं।
श्मशान में तीन बाद फूल चुने जाते हैं। ऐसे में प्लेटफार्म भी घिरा रहता है। तब तक वहां अन्य कोई अंतिम संस्कार नहीं कर सकता है। गंगा मोटर कमेटी के पदाधिकारियों के साथ अब आचार्य भी कहने लगे हैं कि अगर यह सिलसिला जा रहा तो श्मशान 120 प्लेटफार्म भी कम पड़ेंगे। अब शवों का आंकड़ा 50 पार जाने लगा है।
कमेटी के कोषाध्यक्ष अनिल मित्तल ने कहा कि जैसे जैसे मृत्यु दर बढ़ रही है, जिला प्रशासन को इसके विकल्प पर तेजी से कार्य करना होगा। शहर में किसी भी श्मशान में स्थानीय लोग और समिति कोविड मृतकों के अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं दे रही है। वहीं, सूरजकुंड में अतिरिक्त शव पहुंच रहे हैं।
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