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पश्चिमी यूपी के किसानों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए 'ऑपरेशन देहात', पुलिस मैदान में

Sun, 20 Dec 2020 01:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ

सार

  • पुलिस कहीं मुकदमे की धमकी दे रही तो किसी को आंदोलन में शामिल न होने की हिदायत
  • गांवों में बने विरोध और समर्थन के गुट, गोपनीय चल रहा पुलिस का अभियान
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Rakesh Tikait
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विस्तार
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दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसान आंदोलन में भाग लेने से रोकने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पुलिस का ऑपरेशन देहात चल रहा है। इस गोपनीय अभियान में किसी किसान को मुकदमे की धमकी दी जा रही है तो किसी को आंदोलन में शामिल न होने की हिदायत दी जा रही है। गांवों में अलग-अलग गुट बन गए हैं। एक भाजपा के समर्थन में तो दूसरा किसान आंदोलन की पैरवी कर रहा है। 

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नए कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली सीमा पर किसानों का आंदोलन करीब एक माह से चल रहा है। सियासत से जुड़े लोगों का मानना है कि आंदोलन तभी सफल हो सकता है, जब इसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भी किसान शामिल हों। ऐसे में पश्चिम के किसानों को आंदोलन में जाने से रोकने के लिए पुलिस मैदान में उतर गई है। इसके लिए पुलिस ने देहात के इलाकों में चक्रव्यूह बनाना शुरू कर दिया है। कोशिश यही है कि यहां के किसान आंदोलन में नहीं पहुंचने चाहिए। 

कई दिन से चल रही निगरानी
पिछले कई दिनों से देहात इलाकों में थाना स्तर से पुलिस किसान नेताओं व सक्रिय किसानों की निगरानी कर रही है। उन्हें हिदायत दी जा रही कि किसान आंदोलन में शामिल होने से पहले पुलिस को बताएं, नहीं तो उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज होंगे। आंदोलन में शामिल होने पर उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। कोई भी शंका हो तो वे संबंधित थाना पुलिस को ज्ञापन दे सकते हैं, जिसे शासन-प्रशासन को भिजवा दिया जाएगा। इसमें थाना स्तर पर स्थानीय भाजपा नेताओं का दबदबा है। 
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बीट कांस्टेबल ज्यादा सक्रिय
प्रत्येक गांव का रिकॉर्ड बीट कांस्टेबल रोजाना थाने में दे रहा है। किस गांव में कौन नेता और किसान नेता सक्रिय है और किसान आंदोलन में जाने की तैयारी कर रहा है, अब इसका पूरा डाटा थाना स्तर पर तैयार हो रहा है। यह सब गतिविधियां देहात के थानों में तेजी से चल रही हैं। हस्तिनापुर, सरधना, जानी, सरूरपुर, इंचौली समेत कई थानों के प्रभारी इसको लेकर रोजाना थाने की सीमा पर चेकिंग भी करा रहे हैं। 

एलआईयू से भी ली जा रही रिपोर्ट
गांव-गांव में किसान आंदोलन को लेकर चल रही गतिविधियों से संबंधित रिपोर्ट स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआईयू) से भी ली जा रही है। कौन-कौन सा गांव और कौन-कौन नेता किसान आंदोलन या फिर भाजपा के समर्थन में बात कर रहे हैं, इस पर एलआईयू की रिपोर्ट रोजाना लखनऊ भेजी जा रही है। पुलिस गोपनीय तरीके से किसानों की घेराबंदी करने में लगी हुई है, ताकि किसान आंदोलन में भाग न ले सकें।

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