जिला अस्पताल और मेडिकल में सामान्य ओपीडी बंद, केवल जरूरी मरीजों का ही होगा इलाज
मेरठ। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद जिला अस्पताल में शनिवार से 2 अप्रैल तक रूटीन ओपीडी बंद कर दी गई है। जो मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे चिकित्सकों ने जरूरी होने पर ही उनका इलाज किया। वहीं, मेडिकल कॉलेज में ओपीडी सामान्य तौर पर चली। हालांकि, सोमवार से रूटीन ओपीडी व ऑपरेशन दो अप्रैल तक नहीं किए जाएंगे।
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ पीके बंसल ने बताया कि जरूरी मरीजों से मतलब वह मरीज जिन्हें भर्ती करने की जरूरत नहीं है, लेकिन दवा और इलाज की आवश्यकता है। जैसे कुत्ते के काटने पर, हृदय रोगियों, बच्चों को परेशानी होने और इमरजेंसी सेवाएं चालू रहेंगी। अस्पताल में फिल्टर क्लीनिक, फ्लू और कोरोना डेस्क हैं। वहां चिकित्सक देखकर यह तय करेंगे मरीज को इलाज की कितनी जरूरत है।
शनिवार को कुत्ते काटने के 49 मरीजों को इंजेक्शन लगाए गए। इमरजेंसी की ओपीडी में 33 मरीज आए, जिनमें से चार को भर्ती किया गया। बच्चों की ओपीडी में 22 और हृदय रोग की ओपीडी में 20 मरीज पहुंचे। प्रमुख अधीक्षक ने बताया कि हृदय रोगियों को 10 दिन की दवा दी गई है।
पर्चा काउंटर पर नोटिस किया चस्पा
पर्चा काउंटर पर चस्पा नोटिस में लिखा है कि किस तरह के मरीजों को दिखाना है और किस तरह के मरीजों को नहीं दिखाना। अगर रोगी पिछले 28 दिनों में किसी विदेश यात्रा से आया है या आप ऐसे किसी रोगी के संपर्क में रहे हैं तो पूछताछ करें। सामान्य बुखार, नजला, खांसी में रोगी को चिकित्सालय में भर्ती करने की जरूरत नहीं है। घर पर ही अलग कमरे में रखकर इलाज कराएं। अगर रोगी के नाक या मुंह से खून आए, नाखून और होंठ नीले पड़ जाएं अथवा तेज बुखार, सूखी खांसी व सांस लेने में तकलीफ हो तो चिकित्सालय लाएं।
जिला अस्पताल को सैनिटाइज किया गया
शनिवार को जिला अस्पताल को सैनिटाइज किया गया। ओपीडी, पर्चा काउंटर, इमरजेंसी वार्ड आदि को सैनिटाइज किया गया। अस्पताल में मरीजों की तादाद बहुत कम रही। जो मरीज भर्ती हैं, उनके तीमारदारों को भी हिदायत दी गई है कि वह भीड़ ना लगाएं। जरूरी हो तो ही एक व्यक्ति रुके।