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ऑनलाइन स्टडी ग्रुप पढ़ाई कम मुसीबत ज्यादा

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ऑनलाइन स्टडी ग्रुप पढ़ाई कम, मुसीबत ज्यादा
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मेरठ। स्कूलों में विभिन्न एप द्वारा विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई कराना शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। एक या दो नहीं, बल्कि इस समय शहर के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं के यही हालात हैं। शिक्षक-शिक्षिका एक अजीब स्थिति से गुजर रहे हैं। स्कूल और सरकार के आदेशों का पालन करने के लिए उन्हें छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई करानी पड़ रही है। जिससे उनका नंबर सभी जगह बंट गया है। शरारती छात्रों ने शिक्षिकाओं के नंबर अपने दोस्तों को बांट दिए हैं। जिससे शिक्षिकाओं के पास अनवांटेड कॉल आनी शुरू हो गई हैं। परेशान करने के लिए ब्लैंक कॉल आती हैं। छात्र अलग-अलग नंबरों से फोन करते हैं। लेट नाइट भी कॉल आनी शुरू हो गई हैं।
व्हाट्सएप पर तस्वीरें, वीडियो और गलत कंटेंट आने का सिलसिला भी चल पड़ा है। नौकरी के दबाव में शिक्षिकाएं छात्रों को डांट भी नहीं सकती हैं। कई टीचर्स ने ऐसी शिकायत स्कूल प्रबंधन को दर्ज भी कराई हैं। कई शिक्षिकाओं ने अपने फोन नंबर बदलकर भाई, पिता और पति के नंबर पर स्टडी ग्रुप को स्थानांतरित कर दिया है ताकि कोई भी इस तरह का संदेश आए तो उस पर सीधे घर के पुरुष ही एक्शन लें। कई शिक्षकों ने स्कूलों में ऑनलाइन स्टडी को बंद करने की बात रखी है।
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केस 1
लॉकडाउन में शहर के एक नामचीन स्कूल द्वारा बनाए गए ऑनलाइन स्टडी ग्रुप में एक छात्र ने रोमांटिक गाने पर टिकटॉक बनाकर पोस्ट कर दिया। सभी छात्रों ने टिकटॉक को देखा तो पढ़ाई के ग्रुप में मनोरंजन और टिकटॉक की चर्चा होने लगी। बाद में टीचर ने छात्र को डांटा और शिकायत प्रिंसिपल से की, तब जाकर कहीं मामला शांत हुआ।
केस 2
शहर के प्राइवेट स्कूल द्वारा संचालित व्हाट्स एप ग्रुप में पढ़ाई के साथ एक दिन एक छात्र ने शिक्षिका के लिए एंग्री इमोजी और वॉलपेपर भेज दिया। शिक्षिका ने जब इमोजी को देखा तो छात्र की शिकायत अभिभावकों से की और दोबारा ऐसी हरकत करने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
केस 3
शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल की अंग्रेजी की शिक्षिका बताती हैं कि जिस दिन से स्कूल में ऑनलाइन पढ़ाई प्रारंभ हुई है, उनका नंबर तमाम जगह बंट गया है। उस दिन से इतने ब्लैंक कॉल आ रहे हैं कि मजबूरन ऑनलाइन स्टडी के लिए अपना नंबर बंद करना पड़ा। अब वह अपने पति के नंबर से ग्रुप संचालित करती हैं।
केस 4
एक अन्य स्कूल की शिक्षिका बताती हैं कि जिस दिन से ऑनलाइन स्टडी शुरू हुई है व्हाट्सएप और मोबाइल का प्रयोग बहुत बढ़ गया है। अभिभावकों के साथ बच्चों पर भी नंबर चले गए हैं। मोबाइल पर संदेश, वीडियो और फोटो अधिक आ रहे हैं। अपना नंबर बंद कर भाई के नंबर पर ऑनलाइन ग्रुप शुरू किया है।
- छात्राएं व शिक्षिकाएं अधिक परेशान
ऑनलाइन पढ़ाई में नंबर बंट जाने के कारण शिक्षिकाएं अधिक शिकार हो रही हैं। क्योंकि छात्रों के अलावा शरारती तत्व भी मनोरंजन के लिए नंबर बदल-बदल कर कभी फोन करते हैं। कभी गलत मेसेज भेजते हैं। वहीं, कई स्कूलों के ग्रुप में तो छात्रों ने क्लास की छात्राओं को परेशान करने के लिए ग्रुप पर मेसेज और वीडियो भी डाल दिए। अभी तक जिन छात्राओं के नंबर उनकी क्लास के छात्रों के पास नहीं थे, अब उनके नंबर ऑनलाइन ग्रुप के माध्यम से साझा हो गए हैं। उन नंबरों को देखकर छात्र संबंधित छात्राओं को देर रात मेसेज या उन्हें गलत कंटेंट भेज रहे हैं। छात्राओं ने इसकी शिकायत अभिभावकों, स्कूल टीचर से की तो ऐसे छात्रों को डांटा भी गया है।
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ऑनलाइन स्टडी में इन बातों का रखें ध्यान
- घर के किसी बड़े, अभिभावकों के फोन नंबर से ही ऑनलाइन स्टडी करें।
- स्टडी ग्रुप में अपनी फोटो या निजी जानकारी साझा न करें।
- ग्रुप से जुड़ने पर हमेशा शालीनता और अनुशासन का व्यवहार करें।
- संयमित व्यवहार और भाषा का प्रयोग करें।
- ध्यान रखें कि स्टडी ग्रुप पढ़ाई के लिए है, मनोरंजन के लिए नहीं।
- ऑनलाइन ग्रुप में हुआ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार व छेड़खानी साइबर अपराध है, इसकी शिकायत पुलिस से भी कर सकते हैं।
वर्जन....
ऑनलाइन स्टडी के फायदे हैं, लेकिन इससे बड़ा नुकसान यही है कि आपस में नंबर साझा हो जाते हैं। यह बहुत पारदर्शी सिस्टम है जो निजी सूचनाओं को भी आदान-प्रदान कर देता है। इसकी वजह से छात्राओं और शिक्षिकाओं को परेशानी हो रही है। इसलिए जरूरी है कि पूरी सावधानी से ऑनलाइन स्टडी ग्रुप का प्रयोग करें। - डॉ पूनम देवदत्त, मनोविज्ञानी
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