मलियाना गन्ना विकास परिषद का अकाउंटेंट नरेश शर्मा गन्ना किसानों की सड़कों का करीब एक करोड़ रुपया गटक गया। पिछले छह सालों से नरेश शर्मा इस भ्रष्टाचार को अंजाम देता रहा और गन्ना विभाग के अधिकारी सोते रहे। यहां तक कि हर साल ऑडिट करने वाले विभाग के ऑडिट सेल को भी इस मामले का पता नहीं लगा। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जांच में यह घोटाला एक करोड़ से भी ज्यादा का निकल सकता है।
शुगर मिलों और गन्ना किसानों के बीच गन्ना विभाग सेतु का काम करता है। किसान शुगर मिलों को अपना गन्ना सीधे आपूर्ति न करके गन्ना विभाग के अंतर्गत आने वाली गन्ना विकास समितियों के माध्यम से देते हैं। इसके लिए गन्ना समितियां किसानों को सदस्य बनाकर उनका बांड बनाती हैं। शुगर मिलें क्षेत्र में गन्ना विकास के लिए गन्ना विकास समितियों को कमीशन देती है। समिति इस कमीशन का 25 फीसदी हिस्सा गन्ना विकास परिषद को देती है। इस पैसे से परिषद गन्ना किसानों के गांवों के संपर्क मार्ग को बनवाने, उनकी मरम्मत कराने और पुलिया आदि का निर्माण कराने में खर्च करती है। गन्ना विकास के लिए मिलने वाले धन को अकाउंटेंट नरेश शर्मा पिछले छह सालों से ठिकाने लगाता रहा और विभाग सोता रहा। निरीक्षण करने वाले अधिकारियों और ऑडिटरों आदि को भी यह भ्रष्टाचार नहीं मिला।
अपने और पत्नी के खातों में डाला विभाग का रुपया
नरेश शर्मा विभाग का पैसा आईसीआईसीआई बैंक में खोले गए अपने और पत्नी के खाते में भेजता रहा और किसी को भी इसकी भनक तक नहीं लगी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ये काम वह इतने शातिर अंदाज में करता था कि असली एडवाइस को फाड़कर कंप्यूटर से फर्जी एडवाइस जनरेट करके उस पर एससीडीआई के कूटचरित हस्ताक्षर करके पैसा अपने खाते में भेज देता था।
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