देवबंद में शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर हुमायूं को लुटेरा बताते हुए उसके मकबरे को तुड़वाने की मांग की थी। इस पर देवबंदी उलमा ने नाराजगी जताई है। उलमा का कहना है कि रिजवी को इस तरह की बातों से परहेज करना चाहिए।
बृहस्पतिवार को दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ खान ने कहा कि हिंदुस्तान में जो किले और मकबरे हैं वे अधिकांश मुस्लिम शासकों की निशानियां हैं। वसीम रिजवी का ये कहना की हुमायूं का मकबरा तोड़ दो सरासर ज्यादती है। उनको यह कहने का कोई हक नहीं है। उलमा ने कहा कि कल वो यह भी कहेंगे कि लालकिला और जामा मस्जिद जैसी ऐतिहासिक इमारतों को भी जमींदोज कर दो। मुफ्ती शरीफ ने कहा कि आज बीजेपी और आरएसएस घर वापसी जैसे मुद्दे उठा रही है। चार साल के भीतर ही बीजेपी ने देश के माहौल में सांप्रदायिकता का जहर घोलकर रख दिया है। मुस्लिम शासकों ने कभी वो काम नहीं किए जो आज बीजेपी और आरएसएस कर रही है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी आरएसएस के इशारे पर काम कर रही है। जिनका मसकद इस्लाम, मुस्लिमों और मुस्लिम शासकों की निशानियों को मिटाना है। उन्होंने रिजवी के बयान को देश को तोड़ने वाला बताया।
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