आरटीओ में भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है। बिना जांच के ही वाहनों की फिटनेस ओके की जा रही है। पैसे के बल पर वाहन मालिक बिना फिटनेस रैंप पर गाड़ी चढ़ाए फिटनेस सर्टिफिकेट हासिल कर रहे हैं। रैंप के दोनों तरफ जहां घास उगी है, वहीं निरीक्षण पिट में बारिश का पानी जमा है। ऐसे वाहनों को भी सर्टिफिकेट जारी हो रहे हैं जिनका फ्लोर जर्जर हो चुका है। ऐसे में ये वाहन सड़क पर लोगों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। आरटीओ अधिकारी स्टाफ की कमी और रैंप के पूरी तरह तैयार नहीं होने को इसका कारण बता रहे हैं।
फिटनेस रैंप पर 30 लाख खर्च
फिटनेस रैंप का निर्माण कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश निर्माण निगम लिमिटेड ने किया है। इस कार्य के लिए 22 लाख 15 हजार रुपये स्वीकृत हुए थे। इसमें दो रैंप विद शेड और दो कमरे बनाए जाने थे। रैंप तो बन गया लेकिन शेड व कमरे नहीं बने। बताया गया कि बजट कम पड़ने से इसका रिवाइज एस्टीमेट बनाकर भेजा गया है। अब यह एस्टीमेट करीब 30 लाख रुपये का हो जाएगा। इतनी लागत लगने के बाद भी रैंप पर वाहनों की फिटनेस नहीं हो रही है।
रैंप पर वाहन के नीचे से होती है जांच
फिटनेस रैंप पर वाहन को चढ़ाकर उसकी नीचे से जांच की जाती है। आरआई रैंप के बीच में बनी इंस्पेक्शन पिट में उतरते हैं और वाहन की जांच करते हैं। इसमें गाड़ी का फ्लोर, ब्रेक, इंजन व नीचे के अन्य कई हिस्सों को देखा व परखा जाता है। इसके बाद ही वाहन को ओके करके फिटनेस सर्टिफिकेट जारी किया जाता है।
स्टाफ की कमी भी आ रही आड़े
आरटीओ में आरआई के तीन पद स्वीकृत हैं, लेकिन एक आरआई राजेंद्र सिंह ही तैनात है। इन्हें डीएल के साथ वाहनों की फिटनेस भी करनी होती है। आरआई राजेंद्र सिंह का कहना है कि डीएल और फिटनेस के लिए अलग-अलग समय बना रखा है। डीएल का काम खत्म करने के बाद वाहनों की फिटनेस जांच करता हूं। रैंप आधा अधूरा बना है, इसलिए इस पर वाहनों को नहीं चढ़ाया जा रहा है।
वर्जन
रैंप और उससे संबंधित कमरों का निर्माण यूपी निर्माण निगम लिमिटेड कर रही है। काम पूरा करने के लिए निगम को पत्र भी भेजे जा चुके हैं। रैंप पर शेड नहीं लगाया गया और न ही कमरे बने हैं। आरआई की कमी दूर करने के लिए भी उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है। - ममता शर्मा, आरटीओ मेरठ
फिटनेस रैंप और कमरों के निर्माण का बजट 22 लाख 15 हजार रुपये मिला था। रैंप तो बन गया, लेकिन अभी उस पर शेड लगना बाकी है। कमरे भी बनने हैं। बजट कम पड़ने के चलते रिवाइज बजट मांगा गया है।
- एससी शर्मा, अवर अभियंता, यूपी निर्माण निगम लिमिटेड