उत्तर प्रदेश स्टेट जीएसटी विभाग ने शहर के नामचीन मिष्ठान विक्रेता रोहताश ग्रुप के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और सुनियोजित कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग ने यह छापा किसी सामान्य सूचना के आधार पर नहीं बल्कि हफ्तों की गोपनीय रैकी और फिल्मी अंदाज में की गई घेराबंदी के बाद मारा है। जांच में सामने आया है कि ग्रुप के 10 ठिकानों पर समानांतर व्यापार (कच्चे का खेल) धड़ल्ले से चल रहा था। हालांकि गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद ग्रुप ने 30 लाख रुपये का टैक्स जमा कर दिया है।
जीएसटी चोरी के इस बड़े सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए विभाग ने बेहद गोपनीय रणनीति अपनाई थी। जीएसटी कमिश्नर के निर्देश पर अधिकारियों की एक विशेष टीम कई दिनों तक सामान्य ग्राहक बनकर रोहताश ग्रुप के अलग-अलग आउटलेट्स पर पहुंचती रही। इन अधिकारियों ने सुबह और शाम के व्यस्त समय में मिठाइयां खरीदीं और भुगतान के बदले मिलने वाली पर्चियों का बारीकी से विश्लेषण किया। जब इन कच्ची पर्चियों का मिलान विभाग के पास मौजूद सरकारी रिकॉर्ड और कंप्यूटर डेटा से किया गया तो भारी अंतर पाया गया। इसी पुख्ता सबूत के आधार पर शुक्रवार को एक साथ 10 ठिकानों पर छापा मारा गया।
रात 2:30 बजे तक खंगाले गए दस्तावेज
शुक्रवार से शुरू हुई यह कार्रवाई शनिवार तड़के करीब 2:30 बजे तक चली। जांच के दौरान अधिकारियों के हाथ ऐसी कच्ची डायरियां और दस्तावेज लगे हैं, जिनमें करोड़ों रुपये के लेन-देन का हिसाब दर्ज है। शुरुआती दबाव और साक्ष्यों को देखते हुए ग्रुप ने मौके पर ही 30 लाख रुपये का टैक्स जमा कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि 30 लाख रुपये की रिकवरी केवल शुरुआत है। जब्त किए गए दस्तावेजों की स्क्रूटनी जारी है और अनुमान है कि जांच पूरी होने पर टैक्स चोरी का यह आंकड़ा करोड़ों में पहुंचेगा। इस बड़ी वित्तीय अनियमितता को देखते हुए अब आयकर विभाग और अन्य जांच एजेंसियां भी पूरी कार्रवाई पर पैनी नजर रख रही हैं।
कहां से कितनी हुई शुरुआती रिकवरी
जीएसटी विभाग के अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार आनंदपुरी में रोहताश ग्रुप का मुख्य और पहला प्रतिष्ठान है जो 1980 के दशक पूर्व स्थापित हुआ था। यहां से 16 लाख रुपये की टैक्स रिकवरी हुई। वहीं रोहटा रोड स्थित प्रतिष्ठान से 2 लाख रुपये वसूले गए। साकेत स्थित प्रतिष्ठान ने 4 लाख रुपये का टैक्स जमा किया। गंगानगर और विश्वकर्मा नगर में स्थित प्रतिष्ठानों से कुल 8 लाख रुपये की रिकवरी की गई।
मिष्ठान कारोबार में कच्चे के खेल का ऐसे हुआ खुलासा
जीएसटी कमिश्नर और सर्च टीम में शामिल अधिकारियों ने बताया कि रक्षाबंधन, दीपावली, भाई दूज और ईद जैसे प्रमुख त्योहारों पर मिष्ठान विक्रेताओं की एक दिन की सेल सामान्य दिनों के दो महीने की बिक्री के बराबर हो जाती है। विभाग को मिले इनपुट के अनुसार कंप्यूटर जनरेटेड डेटा और वास्तविक बिक्री में भारी अंतर पाया गया।
हमने रेकी के जरिए इस गड़बड़ी को पकड़ा है। हमारे अधिकारियों ने खुद मिठाई खरीदकर साक्ष्य जुटाए। फिलहाल जब्त डायरियों की गहन जांच हो रही है और ग्रुप के शीर्ष पदाधिकारियों से पूछताछ जारी है। — सुशील कुमार सिंह, जीएसटी कमिश्नर (ग्रेड टू)