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अधिकारी नहीं चाहते शहर से बाहर हों बस अड्डे

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मेरठ। रोडवेज के अधिकारी नहीं चाहते रोडवेज बस अड्डा शहर से बाहर हो। आईजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायत पर आरएम ने कहा कि बस अड्डों के बाहर जाने पर शहर में प्राइवेट वाहनों की संख्या बढ़ेगी और इससे प्रदूषण ज्यादा होगा। साथ ही रैपिड ट्रेन चलने का फायदा यात्रियों को तभी ज्यादा मिलेगा, जब उन्हें अपने गंतव्य के लिए रेल स्टेशन के पास ही रोडवेज बस सुलभ हो जाए।
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एमडीए द्वारा बनाई गई मेरठ महायोजना 2021 में रोडवेज बस अड्डों को शहर से बाहर ले जाना था। अब तक दोनों बस अड्डों को बाहर ले जाना तो दूर, इनके लिए जमीन का भी इंतजाम नहीं किया गया है। भैसाली और सोहराबगेट बस अड्डे से संचालित हो रही बसों के चलते शहर में लगने वाले जाम और वायु प्रदूषण का मामला एनजीटी में भी गया था। वहां भी उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने अड्डों के बाहर जाने पर यात्रियों को वहां तक पहुंचाने के लिए ज्यादा प्राइवेट वाहनों की जरूरत पड़ने की बात कही थी। इस बीच रोडवेज ने भैसाली बस अड्डे को पांच करोड़ रुपये की लागत से दोबारा तैयार कर लिया और शासन ने सोहराबगेट बस अड्डे को पीपीपी मॉडल में विकसित करने की स्वीकृति दे दी। इसी बीच आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश खुराना ने आईजीआरएस पोर्टल पर रोडवेज बसों से हो रहे वायु प्रदूषण की शिकायत कर दी।
रैपिड और मेट्रो का लिया सहारा
रोडवेज आरएम केके शर्मा ने प्रधान प्रबंधक आईजीआरएस परिवहन निगम मुख्यालय को पत्र भेजकर जवाब दिया कि दोनों बस अड्डे महत्वपूर्ण हैं। भैसाली अड्डे से देहरादून, हरिद्वार, सहारनपुर, चंडीगढ़, करनाल, दिल्ली, जयपुर, अलवर आदि के लिए सीधी बसे जाती हैं। सोहराबगेट डिपो से मुरादाबाद, बरेली, अगरा, लखनऊ आदि रूटों की बसें मिलती हैं। अगर दोनों बस अड्डों को शहरी सीमा से बाहर कर दिया जाएगा तो यात्रियों को परिवहन सेवा के लिए प्राइवेट वाहनों, टेंपो, आटो, कार एवं दुपहिया वाहनों का उपयोग करना पड़ेगा। इससे शहर में अतिरिक्त यातायात एवं प्रदूषण की समस्या होगी। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना आरआरटीएस के अंतर्गत इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम के तहत यात्रियों को देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, बिजनौर, नजीबाबाद, कोटद्वार आदि स्थानों के लिए बस सेवा भैसाली अड्डे से उपलब्ध होगी। इस व्यवस्था से सड़कों पर प्राइवेट वाहनों का दबाव कम होगा और प्रदूषण में कमी आएगी। आरएम ने बताया कि परियोजना के लिए भैसाली बस अड्डे से लगी परिवहन निगम की कार्यशाला और अधिकारी आवास एवं गेस्ट हाउस की भूमि परियोजना के लिए चिह्नित की गई है। इस जमीन पर रैपिड ट्रेन एवं मेट्रो के स्टेशन का निर्माण प्रस्तावित है। परियोजना में रैपिड रेल व मेट्रो के स्टेशन का एक गेट बस अड्डे में भी दिए जाने का प्रस्ताव है। ऐसी स्थिति में बस अड्डे को बाहर करने से परियोजना का उद्देश्य विफल हो जाएगा।
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