अनुवांशिक बीमारियों की जांच गर्भ में ही संभव
विरासत में हमें सिर्फ नैन-नक्श ही नहीं, कई बीमारियां भी मिल जाती हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती हैं। अब मेरठ में भी शिशु में खून से संबंधित होने वाली अनुवांशिक बीमारियों की जांच गर्भ में ही संभव हो जाएगी। दरअसल, मेडिकल कॉलेज में हाई परफार्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी मशीन (एचपीएलसी) आ गई है। इसी महीने के आखिर तक इससे जांच होनी शुरू हो जाएगी।
विदेश की है मशीन
यह मशीन यूएसए की बनी हुई है और करीब 45 लाख रुपये कीमत की है। इसके लिए मेडिकल कॉलेज से डिमांड भेजी गई थी।
मेडिकल कॉलेज के नोडल अधिकारी डॉ. नवदीप रत्न कहते हैं कि जीवन शैली में बदलाव के कारण काफी तादाद में बच्चे किसी न किसी तरह की समस्या के साथ पैदा होते हैं। इस तरह की समस्याओं से बचाव के लिए गर्भावस्था में ही जांच की जा सकेगी। गर्भवती महिला को गर्भावस्था के पहले तीन महीने में ही थैलेसीमिया की जांच करा लेनी चाहिए। कैंसर आदि होने के भी अनुवांशिक कारण हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि यह मशीन रखने के लिए सेटअप तैयार कर लिया गया है। इस माह के आखिर तक इससे जांच शुरू कर दी जाएंगी।