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Meerut News: अब सड़कें होंगी खाली, खुलेंगे स्कूल... फिर से पटरी पर लौटेगी जिंदगी

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हाईवे पर बसे दर्जनों गांव, कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की बदल जाती है जिंदगी, स्कूल-कॉलेज भी हो जाते हैं बंद
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शरद गुप्ता
दौराला। जिस सड़क पर दस दिन से कदम रखने की जगह नहीं थी, वहां आज फिर से वाहनों की आवाज सुनाई देगी। जिस रास्ते से बाजार पहुंचने के लिए लोगों को कई किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ा, वहां अब बैरिकेडिंग हटेगी और रास्ते छोटे हो जाएंगे। कल तक हाईवे पर हर तरफ बोल बम के जयकारे थे, कांवड़ियों के जत्थे थे और सेवा में जुटे लोग थे, लेकिन आज से वही सड़कें धीरे-धीरे अपनी पुरानी रफ्तार पकड़ेंगी। चतुर्दशी के पर्व के साथ ही कांवड़ यात्रा का समापन हो जाएगा। हाईवे से जुड़े गांवों-कॉलोनियों में दस-11 दिन से बदली जिंदगी अब पुराने ढर्रे पर लौट आएगी।
दादरी से लेकर सकौती, दौराला, सिवाया और मोदीपुरम तक कांवड़ यात्रा ने लोगों की दिनचर्या बदल दी थी। मुख्य मार्ग पर यातायात व्यवस्था में बदलाव के कारण लोगों ने छोटे रास्तों का सहारा लिया। हाईवे के कट बंद होने से रोजमर्रा के सामान के लिए भी अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ी। किसानों को खेतों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़े तो नौकरी और जरूरी काम से निकलने वालों को भी रास्ते और समय दोनों बदलने पड़े। (संवाद)
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दुकानदारों ने बदला कारोबार का समय
कांवड़ यात्रा के दौरान मार्ग किनारे के दुकानदारों का कारोबार भी सामान्य दिनों से अलग रहा। फल, पानी, पेय पदार्थ, खाने-पीने का सामान और जरूरत की दूसरी चीजों की मांग बढ़ी। कई दुकानदारों ने देर रात तक दुकानें खुली रखीं। अब यात्रा खत्म होने के साथ बाजार फिर स्थानीय ग्राहकों के हिसाब से सामान्य समय पर चलने लगेगा।

अब खेत और बाजार तक आसान होगी पहुंच
कांवड़ मार्ग से जुड़े गांवों के लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत यातायात सामान्य होने की होगी। जिन लोगों को दौराला, सकौती या अन्य बाजारों तक जाने में अतिरिक्त समय लग रहा था, अब उन्हें राहत मिलेगी। किसान भी बिना लंबा चक्कर लगाए खेतों तक पहुंच सकेंगे। स्कूल-कॉलेजों में भी छुट्टियों के बाद सामान्य गतिविधियां शुरू होंगी।

लोग बोले- परेशानी थी, पर आस्था के आगे सब छोटी
हाईवे के कट बंद होने से रोजमर्रा का सामान लेने के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ी। परेशानी हुई, लेकिन कांवड़ियों की आस्था के आगे सभी ने सहयोग किया। -
कपिल जाटव, एडवोकेट, गांव रुहासा

दुकानों का समय और कारोबार दोनों बदल गए थे। कांवड़ियों की जरूरत के सामान की मांग बढ़ी। सेवा का अवसर मिला, अब बाजार सामान्य होगा। -हरपाल चौहान, अध्यक्ष, व्यापार संघ दौराला

यातायात व्यवस्था बदलने से स्कूल-कॉलेजों में छुट्टी कर दी गई। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई, लेकिन अब रास्ते सामान्य होने से स्कूल व्यवस्था भी सुचारु होगी। -सत्यपाल सिंह वर्मा, प्रधानाचार्य, बाल विद्या मंदिर इंटर कॉलेज
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हर साल की तरह कॉलोनी के आगे खुले कट को बैरिकेडिंग से बंद कर दिया गया। लंबा चक्कर लगाकर सामान लाना पड़ा। रास्तों की परेशानी अपनी जगह थी, लेकिन सड़कों पर आस्था का जो दृश्य दिखा, वह याद रहेगा। अब रास्ते खुलेंगे तो पुरानी रफ्तार लौटेगी। -रवि चौधरी, अक्षरधाम कॉलोनी
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