मेरठ। आए दिन डग्गामार बसों पर रोक लगाने की मांग को लेकर ज्ञापन देने और धरना प्रदर्शन में इस मुद्दे को जोर शोर से उठाने वाले नेताओं को ही अब इसकी जिम्मेदारी दे दी गई है। आरएम ने नेताओं के पाले में गेंद डालते हुए एक कमेटी का गठन कर दिया है। इस कमेटी में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के आठ पदाधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी है। कमेटी में शामिल नेता सुबह 8 बजे से पूर्वाह्न 11 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक भैसाली बस अड्डे की परिधि से चलने वाली डग्गामार बसों का संचालन रोकेेंगे।
मेरठ-दिल्ली-मुजफ्फरनगर आदि रूट पर डग्गामार बसें रोडवेज के समानांतर चल रही हैं। विभाग ने सर्वे कराकर 179 डग्गामार बसों की सूची आरटीओ से लेकर शासन तक भेजी थी। विभाग का कहना है कि हर महीने डग्गामार बसें रोडवेज का करीब दस करोड़ रुपये का राजस्व हड़प रही है। इन पर लगाम लगाई जाए। शिकायत होने के बाद भी डग्गामार बसों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। डग्गामारों की हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि अब वे अपनी बसों को भैसाली बस अड्डे के सामने और आसपास से ही संचालित करने लगे हैं। रोडवेज के कर्मचारी संगठन डग्गामार बसों पर लगाम लगाने की लगातार मांग करते रहे हैं। आरएम नीरज सक्सेना ने इसका संज्ञान लेते हुए आठ सदस्यीय कमेटी बनाकर अब कर्मचारी नेताओं को ही इसकी जिम्मेदारी सौंप दी है। इस कमेटी में राजीव त्यागी, लाखन सिंह, वीरेंद्र सिंह, सुहेल अहमद, गुलशाद अली, जितेंद्र शर्मा, चतर सिंह और भारत भूषण आदि संगठन पदाधिकारियों को शामिल किया गया है। कर्मचारी नेताओं को सुबह 8 बजे से पूर्वाह्न 11 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक भैसाली बस अड्डे के आउट गेट से लेकर अधिकारी निवास तक बराबर निगरानी रखनी होगी। इस परिधि में कोई डग्गामार वाहन यात्री बैठाते मिलेंगे तो एआरटीओ से संपर्क कर इन्हें सीज कराया जाएगा। इस बारे में आरएम नीरज सक्सेना ने बताया कि डग्गामार वाहनों का सर्वे कराकर 179 बसों की नंबर के साथ सूची तैयार कराई गई थी। यह सूची परिवहन विभाग के अलावा रोडवेज मुख्यालय भी भेजी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब ये बसे भैसाली के सामने से ही संचालित होने लगी हैं। अब कर्मचारियों की कमेटी इन बसों पर लगाम लगाएगी।