टीबी की पहचान के लिए जांच कराने अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा
कोरोना काल में जांच कम होने से टीबी खत्म करने की मुहिम को लगा झटका
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। टीबी की जांच के लिए अब डाकखाने के जरिए भी सैंपल जमा किए जाएंगे। लोग अपने स्थानीय डाकखाने में सैंपल दे सकेंगे। इससे जांच के लिए लोगों को अस्पताल जाना नहीं पड़ेगा। वहीं, कोरोना काल में टीबी की जांच में कमी आई है।
इस साल जनवरी से मार्च तक टीबी के 1991 मरीज मिले थे, यानी हर माह 663 से ज्यादा मरीज मिले। अप्रैल और मई में महज 204 मरीज मिले हैं। छह माह में 10-10 दिन के दो जांच सर्वे होने थे। लेकिन सिर्फ फरवरी में एक ही सर्वे हो सका। इसमें 150 से ज्यादा मरीज मिले थे। दूसरा सर्वे कोरोना काल की भेंट चढ़ गया। प्रधानमंत्री ने साल 2025 तक टीबी मुक्त भारत की मुहिम शुरू की थी। इसे अमली जामा पहनाने के लिए लगातार सर्वे, निजी चिकित्सकों और मेडिकल स्टोर संचालकों को टीबी मरीजों की रिपोर्ट देने की अनिवार्यता की गई। हर मरीज का रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड करने का आदेश दिया। लेकिन कोरोना महामारी के चलते इस मुहिम को पलीता लग गया।
पहचान न होने से खतरा ज्यादा
टीबी के मरीजों की पहचान कम होने से इसके फैलने का खतरा ज्यादा है, क्योंकि अगर टीबी का एक मरीज इलाज नहीं कराता है तो वह 10 से 15 मरीजों को संक्रमित कर सकता है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. एमएस फौजदार ने बताया कि ओपीडी नहीं चल रही है। सर्वे नहीं हो सका है। इससे टीबी मरीजों की पहचान में कमी आई है। जांच बढ़ाने के लिए डाकखाने के जरिए सैंपल लिये जाएंगे। टीबी का इलाज बीच में छोड़ना या जांच न कराना गलत है। इससे बीमारी बढ़ सकती है। कोरोना काल में टीबी खत्म करने की मुहिम को तगड़ा झटका लगा है।
ये लक्षण दिखें तो कराएं तुरंत जांच
- दो हफ्ते से लगातार खांसी होना
- बुखार, भूख न लगना
- रात में पसीना आना
- वजन में लगातार गिरावट