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मिट्टी में मिल गया 51 लाख का डिवाइडर

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मेरठ। अधिकारियों की मनमर्जी से सरकारी धन की किस तरह से फिजुलखर्ची होती है, इसका प्रत्यक्ष नमूना दिल्ली देहरादून हाईवे पर मिट्टी में मिला 51 लाख का डिवाइडर है। कई बार जगाने के बाद भी परतापुर तिराहे से आगे दिल्ली-देहरादून हाईवे पर डिवाइडर का निर्माण चलता रहा और खजाने का दुरुपयोग होता रहा। जबकि इसी मार्ग पर रैपिड रेल के पिलर का निर्माण शुरू करने से पहले बैरिकेडिंग लगाने का कार्य किया जाना है। लेकिन लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारी इस बात को नकारते रहे कि अभी नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (एनसीआरटीसी) कोई कार्य नहीं करने जा रहा है। लेकिन अब साफ हो गया है कि जो डिवाइडर बनाया गया वो टूट गया और जो बचा है उसे भी एनसीआरटीसी अगले सप्ताह तक तोड़ देगा।
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अमर उजाला ने लगातार इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया। जनपद के प्रभारी मंत्री श्रीकांत शर्मा से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों को चेताया गया। लेकिन किसी भी अधिकारी ने इस बात पर संज्ञान लेने की कोशिश तक नहीं की। अब जाकर पीडब्ल्यूडी ने एनसीआरटीसी को पत्र लिखकर सड़क पर डिवाइडर के स्थान पर बैरिकेडिंग लगाने को कहा है। जबकि यही सुझाव अमर उजाला ने अपने 11 जुलाई के अंक में पीडब्ल्यूडी को दिया था। लेकिन उसे अनसुना कर दिया गया था।
ये है मामला
परतापुर तिराहे से आगे दिल्ली-देहरादून हाईवे पर दिल्ली की तरफ मोहिउद्दीनपुर चौकी से भूड़बराल तक डिवाइडर का निर्माण एक महीने पहले किया गया। अब कादराबाद पुलिस चौकी से मोहिउद्दीनपुर पुलिस चौकी तक एनसीआरटीसी द्वारा बैरिकेडिंग लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। अगले कुछ दिनों में दोनों तरफ बैरिकेडिंग लगाने का कार्य किया जाएगा। लेकिन पीडब्ल्यूडी ने इस साढ़े तीन किमी के डिवाइडर में 51 लाख रुपये बेकार कर दिए।
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कौन है इसका जिम्मेदार
इस डिवाइडर का निर्माण कार्य 11 जुलाई से शुरू किया गया था। जिस पर पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को कहा गया था कि एनसीआरटीसी के अधिकारियों से समन्वय बना लिया जाए क्योंकि यहां बैरिकेडिंग होगी तो डिवाइडर तोड़ना पड़ेगा। लेकिन उसके बावजूद एक महीने से पहले ही निर्माण कार्य लगभग पूरा कर लिया गया, जबकि यह मामला प्रशासन से लेकर शासन तक के संज्ञान में था। ऐसे में सवाल है कि जब सभी को पता था कि डिवाइडर बनाना बेकार है तो सरकारी धन की बर्बादी क्यों की गई और अब इसका जिम्मेदार कौन है।
उन्होंने काम जल्दी शुरू कर दिया था
हमारी एनसीआरटीसी से मौखिक स्तर पर बात हुई थी। उन्होंने हमसे कहा था कि हमारा अक्तूबर-नवंबर तक पिलर का कार्य शुरू होगा। वहां डिवाइडर न होने से खतरा था जिससे दुर्घटना घट सकती थी। लेकिन अब कार्य उन्होंने जल्दी से शुरू कर दिया। अब हमने एनसीआरटीसी को पत्र लिख दिया है कि अब आप सड़क पर डिवाइडर वाले स्थान पर बैरिकेडिंग लगा दीजिए। -अरविंद कुमार, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी
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