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पत्तियों से नहीं होगा प्रदूषण, मिल्चर मशीन है समाधान

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ट्रेस मल्चिंग मशीन की जानकारी देते गन्ना महाप्रबंधक राजकुमार टाया। - फोटो : SARDANA
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सरूरपुर। गन्ना विभाग ने ट्रेस मल्चिंग कल्चर विधि शुरू की है। जिससे किसानों को फसल के अवशेष खेत में जलाने की जरूरत नहीं है। ट्रेस मल्चिंग कल्चर को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय बजाज शुगर मिल के प्रबंधन ने किसानों को इस विधि की जानकारी दी।
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फसलों के अवशेषों को जलाने से हो रहे प्रदूषण पर नियंत्रण करने के लिए प्रदेश के गन्ना आयुक्त संजय भूसरेड्डी कहा है कि फसल अवशेष जलाना कानूनी अपराध है किसान अपनी फसल के अवशेष ना जलाए बल्कि खेत में ट्रेस मल्चिंग कर ज्यादा आमदनी कर सकते हैं। इस नयी विधि को बढ़ावा देने के लिये गन्न आयुक्त ने चीनी मिल व गन्ना आयुक्त को लागू कराने के लिये लिखा है। ट्रेश मल्चिंग कल्चर के तहत फसल के अवशेषों को जलाने के स्थान पर उचित प्रबंधन कर खेत की मिट्टी को पोषक बनाया जा सकता है। बजाज शुगर मिल किनौनी महाप्रबंधक राजकुमार टाया ने बताया कि किसान अपने खेत में ट्रेस मल्चिंग कर अधिक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। इस विधि में गन्ने की पत्तियों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। इससे खेती सुरक्षित रहती है तथा खरपतवार कम होता है। बताया कि गन्ना खेती में यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए गन्ना उपायुक्त लखनऊ के आदेश के बाद अब मिल की और से फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने के लिये शुगर मिल ट्रेस कल्चर एंड मैनेजमेंट डिवाइस की व्यवस्था कर रहा है। जीएम टाया के मुताबिक डालमपुर गांव में किसान संसार सिंह पूनिया के खेत मे इस ट्रेस मल्चिंग कल्चर का किसानों को उपयोग करके दिखाया गया। जिसके चलते किसान इस कल्चर को अपना रहे हैं। वहीं मिल की ओर से एक टीम बनाकर किसानों को जागरूकता और यंत्र मुहैया कराने के बारे में जानकारी दे रही है।
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