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ठंडे हुए रकम ठिकाने लगाने के फंडे   

Thu, 17 Nov 2016 01:53 AM IST
रोहित अग्रवाल/मेरठ
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बैंक में जमा कराने के लिए पहुंचाए गए नोट। - फोटो : अमर उजाला
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काले धन को ठिकाने लगाने के फंडे सरकारी सख्ती के आगे अब ठंडे होने लगे हैं। मोटी रकम रखने वाले तो परेशान हैं हीं, घर में तीन-चार लाख जोड़कर रखने वालों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। आयकर विभाग का डर उन्हें सता रहा है। ऐसे में बड़े नोटों के रूप में जोड़ी गई रकम को एडजस्ट करने के प्रयास हो रहे हैं। किसी रिश्तेदार या करीबी के खाते में कैश शिफ्ट करने की प्लानिंग बन रही हैं। यही नहीं, एक हजार और पांच सौ के नोटों को लोन, बीमा पॉलिसी या फिक्स डिपॉजिट में खपाया जा रहा है। अमर उजाला की लाइव रिपोर्ट।
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घोषणा का टैक्स है, जमा कर लो
दिल्ली रोड स्थित यूनियन बैंक  की शाखा में एक बड़े ट्रांसपोर्टर अपने पार्टनर के साथ भीड़ से बचते-बचाते ब्रांच मैनेजर के केबिन तक पहुंचे। ट्रांसपोर्टर ने मैनेजर के सामने डिपोजिट स्लिप रख दी। इसे देख मैनेेजर हैरान होते हुए बोले, इतना बड़ा अमाउंट ? ट्रांसपोर्टर बोला सर कहां बड़ा है? सवा छह लाख ही तो हैं। जो प्रापर्टी की घोषणा की थी, उसका आयकर है। सरकारी खाते में जमा कराना है। मैनेजर ने उन्हें अपने खाते से कैश ट्रांसफर करने की सलाह दी। लेकिन वह कैश ही जमा कराना चाहते थे। उनके पास 500 और 1000 के नोट थे। पूछने पर जब ट्रांसपोर्टर ने बताया कि उन्होंने यह घोषणा तीन माह पहले की थी तो मैनेजर भी चकरा गए। उन्होंने कहा कि घोषणा पत्र और आईडी दे जाओ। अधिकारियों से वार्ता के बाद ही कुछ संभव है।
लोन चुकता करने पहुंचे, बैरंग लौटे 
टीपी नगर निवासी एक व्यक्ति दिल्ली रोड स्थित एचडीएफसी ब्रांच पहुंचा। बैंक के लोन विभाग के एक कर्मचारी से कहा कि मैंने बैंक से बाइक का लोन लिया था। कुछ किश्तें जमा हैं। अब पूरा लोन चुकता करना है। मेरे पास 500 और 1000 के नोट हैं। जो बैलेंस बनेगा, जमा हो जाएगा। कर्मचारी ने कैश लेने के बजाय खाते से चेक देकर लोन चुकाने की सलाह दे दी। यह सुनकर वह लौट गया। 
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मामा को मिली मायूसी
दिल्ली रोड स्थित बैंक के खाते में एक सज्जन हजार और पांच सौ के नोटों के रूप में डेढ़ लाख रुपये लेकर पहुंचे। काउंटर पर स्लिप की जांच में खाताधारक के हस्ताक्षर नहीं मिले। पूछने पर सज्जन बोले कि खाता मेरे भांजे का है। बैंक ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि या तो खाताधारक खुद आए या फिर जमा स्लिप पर उसके साइन हों। साथ में अथॉरिटी लेटर और आईडी भी हो। इसके बाद आपकी आईडी से कैश जमा हो सकता है। मामा मायूस होकर लौट गए।
अधूरी रही एक मुश्त की तमन्ना
सुबह 10:15 बजे एक व्यक्ति बैग में 500, 1000 के नोट लेकर एलआईसी दफ्तर पहुंचा। पूछा कि उसकी और पत्नी की 25-25 साल की दो पॉलिसी हैं। किश्तें छमाही जाती हैं। क्या पांच साल की बाकी किश्तें एकसाथ जमा हो जाएंगी। लेकिन कर्मचारियों ने उसे लौटा दिया।
इनका हो गया कैश जमा
यूनियन बैंक शाखा में एक रिटायर टीचर पहुंचे। बैग से 500-500 की चार गड्डियां निकाली। ब्रांच मैनेेजर कुछ बोलते, उससे पहले ही इन सज्जन ने कहा कि फरवरी में बेटी की शादी है। जेवर बनवाने के लिए कुछ दिन पहले बैंक से निकाले थे। अब बड़े नोट बंद हो गए, इसलिए जमा करने आया हूं। बैंक ने डिपोजिट स्लिप पर आईडी लगवाकर कैश जमा करा लिया।
खाते में जमा कराना ही विकल्प
सख्त नियमों से काला धन ठिकाने लगाने के सभी रास्ते बंद हो रहे हैं। अब लोगों के पास बैंक में पैसा जमा कराने का ही माध्यम बचा है। बैंकों में रकम जमा और निकासी के नियम भी सख्त कर दिए गए हैं। किसी भी खाते में लेनदेन के लिए खाताधारक का अथॉरिटी लेटर जरूरी है। सरकार का यह कदम भविष्य में सार्थक परिणाम देगा।- अविनाश तांती, एलडीएम 
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