फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नोट बंदी से सहकारी बैंक के किसान बेहाल  

Thu, 17 Nov 2016 01:53 AM IST
राजदीप जाखड़ /मेरठ
विज्ञापन
बैंक में नोट लेने के लिए लगी लोगों की लाइन। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
नोट बंदी के बीच जिला सहकारी जिला बैंक के खाताधारकों के सामने मुसीबत खड़ी हो गई है। किसान अपनी पुरानी करेंसी इन बैंकों में जमा नहीं करा पा रहे हैं। वहीं, नई करेंसी पास न होने से खाद और बीज के साथ अन्य सामान भी नहीं खरीद पा रहे हैं। किसान नेताओं ने सहकारी बैंकों में भी कॉमर्शियल बैंकों की तरह 24 नवंबर तक पुरानी करेंसी जमा करने की छूट देने की मांग की है।
विज्ञापन

जिला सहकारी बैंक की मेरठ और बागपत जिले में 53 शाखाएं हैं। जबकि, 123 साधन और किसान सहकारी समितियां हैं। दोनों जिलों के अधिकतर किसानों के खाते जिला सहकारी बैंक की शाखाओं में हैं। सहकारी समितियों से खाद, बीज के लेनदेन के अलावा फसली लोन के लिए किसान इस बैंक से जुड़े हैं। बैंक में करीब 1 लाख 40 हजार खाताधारक हैं, जिनके 1153 करोड़ रुपये बैंक में जमा हैं। किसानों ने खाद, बीज के अलावा फसली लोन के रूप में 700 करोड़ रुपये ले रखे हैं।
गले नहीं उतर रहा तर्क
चार दिन छूट देने के बाद आरबीआई ने दो दिन पहले बैंक में 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट लेने पर बैन कर दिया है। आरबीआई का तर्क है कि इन बैंक शाखाओं में नकली नोट पकड़ने वाली मशीनें नहीं हैं। इससे जमा होने वाली करेंसी में नकली नोट भी जमा हो रहे हैं। यह तर्क बैंक कर्मियों और खाताधारकों के गले नहीं उतर रहा है। किसानों का कहना है कि नकली नोट कर्मचारी पहले से बिना मशीन के ही पकड़ते रहे हैं। सही तरीके से नोटों की जांच करने के बाद ही कर्मचारी नोट जमा करते हैं।
विज्ञापन

23 शाखाओं में तो हैं मशीनें
जनपद का जिला सहकारी बैंक प्रदेश का नंबर वन सहकारी बैंक है। बैंक ने किसानों के साथ शुगर मिलों को भी 400 करोड़ रुपये का लोन दे रखा है। बैंक की 53 शाखाओं में से 23 शाखाओं में नकली नोट पकड़ने वाली मशीन लगी हैं। किसान नेताओं का कहना है कि उन शाखाओं में तो आरबीआई को नोट जमा करने की छूट देनी चाहिए, जिनमें मशीनें लगी हैं। आरबीआई के आदेश से ये बैंक शोपीस बनकर रह गए हैं। 
नहीं जमा कर पा रहे पुराने नोट
खाताधारक किसान पुराने नोट जमा नहीं कर पाने से परेशान हैं। गांव सैनी निवासी रामपाल, लावड़ निवासी इंतजार अहमद, समसपुर निवासी ओमपाल आदि ने बताया कि उनके खाते सहकारी बैंक में हैं। वे लंबे समय से इसी बैंक से लेनदेन करते आ रहे हैं। इसी बैंक में अपनी बचत जमा करते हैं और इसी से लोन लेते हैं। गंगा स्नान के चलते घर पर रखे पुराने नोट जमा नहीं कर सके थे। जब लौटकर आए तो सरकार ने नोट बैन कर दिए। अब उनके पुराने नोटों का क्या होगा। गेहूं बुआई के लिए खाद, बीज की जरूरत है। बच्चों को पढ़ाई, दवाई व अन्य खर्च के लिए धन की आवश्यकता है। 
केंद्र सरकार ने कमर तोड़ी
केंद्र सरकार ने जिला सहकारी बैंक में पुराने नोट लेने पर पाबंदी लगाकर खाताधारकों की कमर तोड़ दी है। बैंक में नकदी जमा नहीं होने से बैंक बंद होने की कगार पा आ गए हैं। आरबीआई कॉमर्शियल बैंकों की तरह इन बैंकों को भी पुराने नोट बदलने और जमा करने की छूट दे, ताकि लोगों को राहत मिले।
विज्ञापन

- जयवीर सिंह, चेयरमैन, जिला सहकारी बैंक लिमिटेड मेरठ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें