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भारत-चीन के बीच हुए इस समझौते से किसानों को मिलेगा लाभ

Mon, 02 Jan 2017 11:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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चीन के वैज्ञानिकों के साथ भारतीय वैज्ञानिक - फोटो : अमर उजाला
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भारतीय बासमती के निर्यात के लिए चीन की राहें खुल गई हैं। चीनी वैज्ञानिकों के दल ने 19 में से 14 चावल मिलों को इसके लिए हरी झंडी दे दी है। भारत और चीन के साथ हुए इस समझौते से जहां देश को विदेशी मुद्रा अधिक मिलेगी, तो किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा। 
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ब्रिक्स सम्मेलन में इसकी सहमति बनने के बाद भारत सरकार ने बासमती चावल निर्यात करने की जिम्मेदारी एग्रीकल्चरल एंड प्रोसिड फूड प्रोडेक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) और बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान (बीईडीएफ) मोदीपुरम को दी थी। जिसके बाद आए चीन के 6 वैज्ञानिकों के दल ने बीईडीएफ  के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर एनपीपीओ डॉ. जसबीर सिंह, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अखिल भारतीय चावल निर्यातक संघ राजन सुंदरेशन के साथ उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर और दिल्ली की 19 राइस मिलों का दौरा कर फूड क्वालिटी परखी थी। इस दल द्वारा चीन सरकार को रिपोर्ट सौंपी गई। जिस पर पहले चरण में यूपी और जम्मू की एक-एक और पंजाब व हरियाणा की 6-6 मिलों को बासमती निर्यात करने की मंजूरी दी गई है।

पहली बार जाएगा बासमती
वैज्ञानिकों का कहना है कि बासमती के मामले में चाइना को बड़े मार्केट के रुप में देखा जा रहा है। खास बात यह है कि यहां से बासमती चायना पहली बार जाएगा। चीन में चावल मोटा है। वहां पर रह रहे भारतीय और दूसरे देशों के लोग इसे पसंद नहीं करते हैं। बासमती की खुशबू दूर देशों तक है। अगर चाइना में बासमती का निर्यात होगा तो दूसरे देशों के लोग भी इसका स्वाद चख सकेंगे। 
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चीन में खुलेंगे ऑफिस
अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फूड क्वालिटी बदल रही है। भारत और चीन में समझौता होने के बाद अब भारत के कुछ बड़े एक्सपोर्टर चीन में ऑफिस खोलने की तैयारी में है। एक्सपोर्टर ने चीन बासमती को भेजने के लिए पूरी तैयारी कर ली है।

राइस मिलों में यह देखा गया 
- मिलों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा गया 
- बासमती की शुद्धता परखी गई
- बासमती स्टोरेज करने की क्या व्यवस्था है
- स्टोरेज से उसकी क्वालिटी पर क्या फर्क पडे़गा 
- निर्यात करने की क्षमता मिलों की कैसी है
- निर्यात के लिए मिले मानक पर खरी भी उतर रही हैं या नहीं 

चीन से बासमती का निर्यात खुलने पर किसानों और निर्यातकों को लाभ मिलेगा। देश को विदेशी मुद्रा अधिक अर्जित होगी। काफी समय से चीन से समझौते के लिए सरकार प्रयासरत थी। निर्यात के लिए भारत ने सभी मानक पूरे किए हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बासमती को नयी पहचान मिलेगी।- डॉ. रितेश शर्मा प्रधान वैज्ञानिक, बीईडीएफ मोदीपुरम 
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