खरखौदा में धरना स्थल पर बैठे किसान वार्ता करते हुए (संवाद)
- औद्योगिक गलियारे के दूसरे चरण के भूमि अधिग्रहण का मामला
- 292.7 हेक्टेयर भूमि के लिए प्रशासन ने गठित की थी टीम
संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे के दूसरे चरण के भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच सहमति बनाने की कवायद एक बार फिर ठंडे बस्ते में जाती नजर आ रही है। किसानों की मांगों पर वार्ता और समाधान के लिए जिलाधिकारी द्वारा गठित टीम को 22 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक टीम ने किसानों से वार्ता नहीं की है। इससे करीब 800 किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
औद्योगिक गलियारे के पहले चरण के लिए प्रशासन भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर चुका है। दूसरे चरण में गांव गोविंदपुर, खड़खड़ी और छतरी के करीब 800 किसानों की लगभग 292.7 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित है। किसान अधिग्रहण का विरोध करते आ रहे हैं। विरोध में करीब दो वर्षों से खरखौदा कस्बे के छतरी मोड़ पर तीनों गांवों के किसान धरनारत हैं।
10 जून को हुई थी किसानों से वार्ता
10 जून को अपर जिलाधिकारी प्रशासन समेत राजस्व विभाग के अधिकारियों की टीम किसानों से वार्ता करने पहुंची थी। इस दौरान किसानों ने भूमि देने पर सशर्त सहमति जताते हुए अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखी थीं। किसानों का कहना था कि यदि उनकी मांगों को स्वीकार किया जाता है तो वह प्रस्तावित योजना के लिए भूमि देने को तैयार हैं। इसके बाद समस्या के समाधान और किसानों से वार्ता के लिए जिलाधिकारी स्तर से अधिकारियों की टीम गठित की गई। टीम को सभी संबंधित अधिकारियों को साथ लेकर किसानों से वार्ता करने और 15 दिन में रिपोर्ट शासन को भेजने की जिम्मेदारी दी गई थी।