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वेस्ट यूपी की ‘राजधानी’, मंत्री पद से बेगानी   

Mon, 20 Mar 2017 12:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर खुशी जताती महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
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वेस्ट यूपी की राजधानी माने जाने वाले मेरठ की यूपी विधानसभा मंत्रिमंडल में भी पूरी तरह उपेक्षा हुई है। जबकि भाजपा की सबसे उर्वरक भूमि मेरठ जनपद रहा है। यही नहीं, संघ का प्रांतीय कार्यालय भी मेरठ में स्थापित है। बावजूद इसके इस जनपद से छह विधायकों में से एक को भी मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से मेरठ की जनता ही नहीं भाजपाई भी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। 
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भाजपा का यदि ठोस वोट बैंक कहीं है तो वह मेरठ में है। 2012 में जब भाजपा 60 सीटों से नीचे सिमट गयी थी, तब भी मेरठ जनपद की सात में से चार विधानसभा सीटों पर भाजपा जीती थी। यही नहीं 2009 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने यहां से सीट जीती थी। 2014 में लोकसभा चुनाव हुए तो मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल लगातार दूसरी बार सांसद निर्वाचित हुए। लोकसभा में सबसे ज्यादा सक्रिय सांसदों में शुमार राजेंद्र अग्रवाल को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी गयी, जबकि उनके स्थान पर जातीय समीकरण साधने की कवायद में पहली बार और बहुत कम अनुभवी सांसदों को मंत्रिमंडल में जगह दे दी गयी। 

अब विधानसभा चुनाव हुआ तो मेरठ जनपद में सात में से छह सीटों पर भाजपा प्रत्याशी विजयी हुए। इनमें सभी अलग-अलग बिरादरियों के हैं। लेकिन इस बार भी वेस्ट यूपी में व्यापारिक, राजनैतिक, भाजपा की सर्वोपरि संस्था संघ का प्रांतीय कार्यालय और क्रियाकलाप यहां स्थापित होने के बावजूद मेरठ को मंत्रिमंडल से पूरी तरह उपेक्षित कर दिया गया। इस उपेक्षा पर आम जनता ही नहीं बल्कि भाजपाई भी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। क्योंकि यूपी सरकार के मंत्रिमंडल में कम से कम एक विधायक के शामिल होने का दावा भाजपाई कर रहे थे। लेकिन मेरठ को यहां भी निराशा हाथ लगी है। 
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सोम की जगह मानी जा रही थी पक्की 
भाजपा के फायरब्रांड चेहरे के तौर पर मंत्रिमंडल में संगीत सोम की जगह पक्की मानी जा रही थी। इसके अलावा सत्यप्रकाश अग्रवाल भी लगातार चौथी बार विधायक बने हैं। सोमेंद्र की दावेदारी युवा गुर्जर के तौर पर तो सत्यवीर त्यागी के समर्थकों के अलावा दिनेश खटीक भी वर्ग के हिसाब से उम्मीद लगाए बैठे थे। 
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