एक तरफ जहां तिरंगे की शान के लिए सीमा पर जवान अपने प्राण न्यौछावर करने से भी पीछे नहीं हटते, वहीं शहर के दो सरकारी विभाग इसके रखरखाव के फेर में फंसे हैं। सूरजकुंड पार्क में लगे तिरंगे को न तो एमडीए और न ही नगर निगम गोद लेने को तैयार है। विभाग एक-दूसरे को पत्र भेजकर असमर्थता जता रहे हैं।
एमडीए ने दिल्ली के कनाट पैलेस की तर्ज पर 10 मई 2016 को क्रांति दिवस पर सूरजकुंड पार्क में तिरंगा फहराया था। 41 मीटर ऊंचा पोल पर 20 फीट लंबा और 30 फीट चौड़ा तिरंगा फहराया गया। एमडीए ने अवस्थापना निधि से 21 लाख रुपये का बजट पास किया था। बजाज कंपनी को तिरंगा लगाने का ठेका दिया गया। तिरंगा फहराए जाने के बाद से सूरजकुंड पार्क की सुंदरता में चार चांद लग गए। लाइटों की रोशनी में रात को तिरंगा जगमगाता है।
निगम ने पार्क तो लिया तिरंगा नहीं
सूरजकुंड पार्क को एमडीए ने ही विकसित किया था। पिछले साल नगर निगम ने पार्क तो हैंडओवर कर लिया, लेकिन तकनीकी कारणों का हवाला देकर तिरंगे को लेने से इनकार कर दिया। एमडीए प्रशासन ने साफ कर दिया है कि उनके पास तिरंगा के रखरखाव के लिए बजट नहीं है। तिरंगा पार्क में लगा है तो निगम को अपने अधिकार में लेना होगा।
एक माह तक नहीं फहरा था तिरंगा
बारिश में फट जाने के कारण पार्क में एक माह तक तिरंगा नहीं फहराया गया था। अमर उजाला ने प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया तो पिछले सप्ताह एमडीए ने तिरंगा फहरा दिया। अब रखरखाव पर विवाद चल रहा है।
साधारण नहीं है तिरंगा
एमडीए का कोई पत्र नहीं मिला है। पत्र आता है तो देखते हैं। वैसे भी पार्क में लगा तिरंगा साधारण नहीं है। जिसके रखरखाव के लिए तकनीकी जानकारी होना जरूरी है। हम एमडीए अधिकारियों से बात करेंगे। - देवेंद्र कुमार कुशवाहा, नगरायुक्त
अधिकारी कर रहे राजनीति
तिरंगे के रखरखाव को लेकर एमडीए अधिकारी राजनीति कर रहे हैं। इसके बारे में कमिश्नर से बात की जाएगी। रखरखाव की जिम्मेदारी तय करायी जाएगी। तिरंगे का अपमान नहीं होने दिया जाएगा।
- हरिकांत अहलूवालिया, महापौर