मेरठ। भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे जीआईएस सर्वे से चिह्नित भवनों को नगर निगम नए गृहकर बिल भेज रहा है। आपत्ति के लिए 213 के नोटिस पर न तारीख है और न ही हस्ताक्षर है। जिसको लेकर व्यापारियों ने नाराजगी जताई है। व्यापारियों का कहना कि नोटिस पर तारीख ही नहीं है तो गृहकर बिल का निस्तारण कैसे और कब तक करेंगे। नए गृहकर लेने के लिए निगम ने नया तरीका शुरू किया है। व्यापारियों ने शिकायत संयुक्त व्यापार संघ से की है।
संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता का कहना है कि महानगर के व्यापारियों का उत्पीड़न करने के लिए नया गृहकर बिल नगर निगम ने वितरित करना शुरू किया है। आपत्ति के निस्तारण में निगम ने बड़ा खेल शुरू किया है, जिस पर व्यापारी नाराज है। आपत्ति निस्तारण के लिए 30 दिन का समय मिलता है। नोटिस पर किसी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं है और न तारीख लिखी है। नगर निगम ही बताए कि नोटिस को किस तारीख से माना जाए और कौन अधिकारी इसको जारी कर रहा है।
नगर निगम की बोर्ड बैठक में जीआईएस सर्वे को होल्ड कर दिया था, इसके बावजूद बिल वितरित किए जा रहे है। अभी 17 वार्डों की सर्वे रिपोर्ट नहीं आई, बावजूद नया गृहकर जारी कर दिया गया। पुराने बिल निकलने भी बंद हो गए है। नगर निगम नए गृहकर में बड़ा खेल रहा है। संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष ने कहा कि ने नए गृहकर को लेकर 14 बिंदु पर नगर आयुक्त से जवाब मांगा था, जिसकी जवाब एक महीने बाद भी नहीं मिला। इस मामले को लेकर व्यापारी जल्द ही मीटिंग करेंगे और नगर आयुक्त से जवाब मांगेंगे।