माछरा। गोआश्रय केंद्र माछरा से 19 गोवंश पशुपालकों ने गोद लिये परंतु उन्हें अभी तक 900 रुपये प्रतिमाह प्रति पशु पालन के लिए नहीं मिल रहे हैं। इसके चलते पशुपालक अपनी जेब से ही पशुओं को चारा खिला के लिए विवश हैं। हालांकि इसकी अनुमति लेने के लिए फाइल डीएम कार्यालय भेज दी है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बेसहारा, आवारा गोवंश को पकड़कर गोआश्रय केंद्र में रखा जा रहा है। जिसके तहत माछरा में भी अस्थायी गोआश्रय केन्द्र बनाया गया। जिसमें बीडीओ माछरा सुरेंद्र सिंह एवं पशुचिकित्साधिकारी माछरा डॉ. संदीप शर्मा ने बताया कि गोआश्रय में 47 छोटे-बडे़ पशु हैं। जिनमें से 19 गोवंश को आसपास के गांवों के पशुपालकों ने गोद लिया है। जिनमें हरीश कुमार पुत्र ज्वाला सिंह निवासी कासमपुर को चार पशु, किशनपाल पुत्र ज्वाला सिंह निवासी कासमपुर को एक, सरोज देवी पत्नी मुुकेश कुमार नंगली अब्दुल्ला को एक, पारुल शर्मा पत्नी लोमेश कुमार निवासी माछरा को एक, जयवीर पुत्र महेन्द्र सिंह कासमपुर को दो, मनवीर पुत्र भोपाल निवासी कासमपुर को एक पशु, मुकेश देवी पत्नी रणवीर निवासी कासमपुर को दो, नन्हे पुत्र हनीफ निवासी नंगला शाहू, सोनू पुत्र कालू निवासी बहलोलपुर, लविन्द्र शर्मा पुत्र मुकेश कुमार निवासी कासमपुर को एक-एक पशु दिया गया है।
बीडीओ माछरा सुरेन्द्र सिंह तथा ग्राम पंचायत सचिव कासमपुर विश्वास शर्मा ने बताया कि जो पशु ग्रामीणों को गोद दिए हैं। डीएम मेरठ से अनुमोदन के लिए उनकी सूची भेज दी गई है। फाइल पर निर्णय नहीं होने की वजह से अभी तक पशुपालकों को प्रति पशु 900 रुपये माहवार नहीं मिल पा रहे हैं। इसलिए वे स्वयं उक्त पशुओं के लिए चारा, पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। उधर, गोआश्रय केन्द्र माछरा की देखभाल करने वाले ग्राम प्रधान कासमपुर शिवराज भाटी ने बताया कि गोआश्रय के पशुओं को लिए बीडीओ माछरा व पशु चिकित्साधिकारी माछरा के संयुक्त खाते में 900 रुपये प्रति गोवंश के हिसाब से बजट आ रहा था परंतु दो माह से नहीं आ रहे हैं। गोआश्रय में गोवंश की देखरेख के लिए कर्मचारी रखा गया है। उसको मानदेय बीडीओ माछरा, प्रधान शिवराज भाटी, ग्राम पंचायत सचिव, पशु चिकित्साधिकारी एवं अन्य प्रधान एवं ग्राम पंचायत सचिव से चंदा एकत्र करके दिया जा रहा है। गोआश्रय में गोवंश के रहने के लिए टिन शेड, तिरपाल, सबमर्सिबल आदि की व्यवस्था की गई है। ग्राम प्रधान कासमपुर शिवराज भाटी ने बताया कि शासन से गोवंश के रखरखाव के लिए निर्धारित बजट शासन से नहीं मिला है।