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धन की व्यवस्था नहीं, कैसे जलेंगे शहर में अलाव

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धन की व्यवस्था नहीं, कैसे जलेंगे शहर में अलाव
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मेरठ। कड़ाके की सर्दी में जलने वाले अलाव के लिए नगर निगम ने अभी तक धन की व्यवस्था भी नहीं की है। यही कारण है कि शहर में 90 स्थानों में से केवल 22 स्थानों पर ही अलाव जलाया जा रहा है। इनमें रैन बसेरे भी शामिल हैं। हालांकि, इनमें से बाहरी रैन बसेरों तक लकड़ी न पहुंचने के आरोप लग रहे हैं।
नगर निगम प्रतिवर्ष लगभग 90 स्थानों पर अलाव जलाता है। तीन दिन से गलन वाली सर्दी पड़ रही है। ठंड से जनजीवन ठहर सा गया है। शहर में काफी लोग खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। शहर के कई चौराहों पर पूरी रात लोग ठंड से सिकुड़ते देखे जा सकते हैं। हालांकि नगर निगम ने ऐसे सभी लोगों के ठहरने के लिए 12 स्थानों पर रैन बसेरे संचालित किए हुए हैं। नगर निगम प्रशासन का दावा है कि रैन बसेरों में बिस्तरों के अलावा चौकीदार की भी व्यवस्था की हुई है। साथ ही अलाव जलाने का भी दावा किया जा रहा है। नगर निगम रिकार्ड के मुताबिक, शहर में 22 स्थानों पर अलाव जलाया जा रहा है। बाकी स्थानों तक अलाव न पहुंचने का मुख्य कारण बजट की कमी है।
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नगर निगम के चीफ इंजीनियर यशवंत कुमार का कहना है कि अलाव की लकड़ी वन विभाग से खरीदी जाती है। उसको मनी ड्राफ्ट भेजा जा रहा है। शहर में अन्य जरूरी स्थानों पर भी अलाव जलवाया जाएगा।
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