हरनंदी यानी हिंडन नदी में फिर से प्राण फूंकने के लिए लोकगीत अहम भूमिका अदा करेंगे। गांव-गांव ये गीत गूंजेंगे, जिसमें न केवल इस नदी का दर्द सुनाया जाएगा बल्कि लोगों को हिंडन पुनर्जीवन मुहिम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। जल बिरादरी के गीत से इसका आगाज हो रहा है। मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने इस गीत को दृश्यों में थोड़े संशोधन के बाद हरी झंडी दे दी है।
निर्मल हिंडन अभियान चल रहा है। प्रदूषण से हांफ रही हिंडन को इससे मुक्त कराने का बीड़ा मंडलायुक्त ने ही उठाया है। इसके लिए जहां हिंडन कोष की स्थापना हो चुकी है तो वहीं योजनाबद्ध तरीके से अलग-अलग चरण तय किए गए हैं। तालाबों का जीर्णोद्घार होना है, साथ ही हिंडन में विभिन्न माध्यमों से जा रहे प्रदूषण को रोकना है। इस बाबत जिन-जिन जिलों से होकर हिंडन गुजर रही है, उनके अधिकारियों के साथ लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। हिंडन कोष में एमडीए एक करोड़ रुपये दे चुका है। कुल मिलाकर लगभग सवा छह करोड़ रुपये इकट्ठा हो चुके हैं। हिंडन में गिर रहे नालों या उसकी सहायक नदियों को साफ करने की मुहिम है। पौधरोपण हो रहा है।
‘कहती है हरनंदी मुझको बचा लो तुम’
इस बाबत अब लोकगीतों का भी सहारा लिया जाएगा। ......कहती है हरनंदी मुझको बचा लो तुम, गीत से इसका आगाज हो रहा है। जल बिरादरी का बनाया गया यह गीत है जिसके दृश्याें में कुछ परिवर्तन होंगे। मंडलायुक्त ने इसे देखकर हरी झंडी देते हुए कुछ संशोधन करने को कहा है। इसके अलावा हिंडन से जुड़े जिलों के लोक गायकों को भी इस मुहिम से जोड़ा जाएगा। लोकगीत जिसमें खासतौर पर रागिनी का भी प्रयोग होगा। ऐसे कई गायकों से संपर्क साधकर बात की जा रही है।
टोलियां बनेंगी
इन गीतों को अंतिम रूप देकर टोलियां बनेंगी, जो गांवों में जाकर प्रचार करेंगे। लोगों को बताएंगी कि हिंडन का क्या इतिहास है। इसके अलावा लोगों को जागरूक किया जाएगा। बताया जाएगा कि यह उनकी भी जिम्मेदारी है कि वह हिंडन को बचाएं। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आने वाली पीढ़ी उन्हें माफ नहीं करेगी।
यह है अभियान के मुख्य बिंदू
औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन, सीवरेज ट्रीटमेंट, नगर निकायों के सॉलिड वेस्ट पर काम, अतिक्रमण हटाने, पौधरोपण करने, हिंडन व उसकी सहायक नदियों के समीप के ग्रामों को 31 दिसंबर तक ओडीएफ घोषित कराने, रजवाहों को पुनर्जीवित करने, किसानों को आर्गेनिक फार्मिंग करने के लिये प्रेरित करने, नहरों से भी हिंडन में पानी डालने, प्रदूषण के स्तर को कम करने, कम्प्रीहेन्सिव हीथ जागरूकता कार्यक्रम, मास मोबिलाइजेशन, रिसोर्स जनरेशन आदि
योजना में यह है शुमार
- पूर्वी यमुना नहर तथा गंगनहर से हिंडन में पानी छोड़ा जाएगा।
- औद्योगिक इकाइयों का प्रदूषण ऑडिट एक माह में पूरा। प्रदूषण फैला रही इंडस्ट्री होंगी बंद
- पौधरोपण
- गांव गांव मुहिम
- हिंडन किनारे तितली या नेचर पार्क डेवलप
- तालाबों के पानी का शुद्धिकरण
कोट
लोकगीतों का ग्रामीण क्षेत्र के लोगों पर तत्काल सकारात्मक असर होता है। ये गीत भावनात्मक रूप से लोगों को जोड़ते हैं। इन्हीं गीतों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा। गांव-गांव यह मुहिम चलेगी। -डॉ. प्रभात कुमार, मंडलायुक्त मेरठ