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स्वामी सानंद महाराज की मौत के लिए उत्तराखंड सरकार जिम्मेदार: निरंजन

Fri, 12 Oct 2018 01:46 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, शामली
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फाइल फोटो
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गंगा की अविरलता और निर्मलता की मांग को लेकर अनशन पर बैठे प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद महाराज ने गुरुवार को ऋषिकेश के एम्स में अंतिम सांस ली। उनके भाई निरंजन स्वरूप अग्रवाल यूपी के कांधला में रहते हैं और उन्होंने जीडी की मौत के लिए उत्तराखंड सरकार और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। परिवार के अन्य सदस्य खबर मिलते ही ऋषिकेश के लिए रवाना हो गए थे।

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प्रोफेसर जीडी अग्रवाल का जन्म कांधला के मोहल्ला रायजादगान में 20 जुलाई 1932 को हुआ था। उनके पिता का आन्नद स्वरूप और माता लीलावती के परिवार की गिनती बड़े जमींदारों में होती थी। तब इनके परिवार के पास 250 बीघा कृषि भूमि थी। उनकी प्रारंभिक शिक्षा कांधला में हुई। कस्बा के हिन्दू इंटर कालेज से 1943 को उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में टॉप किया था। इसके बाद बीएससी की पढ़ाई लखनऊ से की और आईआईटी रुड़की से सिविल इंजीनियरिंग की। वे गंगा महासभा नामक गैर सरकारी संगठन के संरक्षक रहे। मध्य प्रदेश के चित्रकूट में महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोडा विद्यालय में पर्यावरण विज्ञान के मानद प्रोफेसर के रूप में कई वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं। वे अविवाहित रहे और अपने भाई के बेटे तरुण अग्रवाल को गोद ले रखा था। 

उनके भाई निरंजन स्वरूप अग्रवाल ने बताया कि जीडी ने गंगा को बचाने के लिए सरकार को खुला पत्र लिखा था, लेकिन उत्तराखंड सरकार ने इस पर गंभीरता नहीं दिखाई। जिस कारण 22 जून से उन्हें पुन: अनशन शुरू करना पडा। इस हादसे की क्षतिपूर्ति नहीं की जा सकती है। उन्होंने दो टूक कहा कि उत्तराखण्ड सरकार और प्रशासन ने उनकी हत्या की है।

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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
संस्कृत छात्राओं को जीडी छात्रवृत्ति
राजकीय महिला महाविद्यालय में संस्कृत की छात्राओं को जीडी अग्रवाल छात्रवृति देते थे। हर साल वह इसे बांटने खुद ही महाविद्यालय में पहुंचते थे, लेकिन लंबे समय से अस्वस्थता के कारण यहां आना कम हो गया था।

1998 में भाविप का कार्यक्रम कराया 
प्रोफेसर जीडी अग्रवाल ने 1998 में कस्बा कांधला में भारतीय विद्यार्थी परिषद का कार्यक्रम कराया था, जिसके वह संयोजक थे। कार्यक्रम में मौजूदा केंद्रीय मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन भी पहुंचे थे। 2002 में महाविद्यालय में संस्कृत की छात्राओं को छात्रवृति वितरण की शुरुआत की थी। वह जब भी कांधला आते थे, तो बच्चों को गंगा की निर्मलता और सुरक्षा के बारे में जागरूक करते थे।  

संत सा जीवन रहा जीडी अग्रवाल का
दिल्ली आईआईटी में सिविल डिपार्टमेंट के हेड ऑफ द डिपार्टमेंट रहे गुरुदास अग्रवाल उर्फ जीडी अग्रवाल का जीवन संत सा रहा। उन्होंने रिटायरमेंट के बाद चित्रकूट विश्वविद्यालय में नि:शुल्क शिक्षा दी। गंगा और पर्यावरण को वह पूरी तरह समर्पित रहे। कांधला के मूल निवासी डॉ जीडी अग्रवाल का परिवार शहर में मंडी क्षेत्र में भी रहता है। उनके भाई ओमप्रकाश गुप्ता डीएवी कॉलेज में बीएड डिपार्टमेंट  के विभागाध्यक्ष थे। सात साल पहले जिला कचहरी के फैंथम हॉल में उन्होंने गंगा और पर्यावरण को लेकर सचेत किया था। डॉ जीडी अग्रवाल से जुडे़ रहे बडकली इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अविनाश त्यागी ने बताया कि अग्रवाल का जीवन एक संत जैसा था।

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