मेरठ। साइबर अपराधी ठगी करने के लिए दूसरों के बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए बाकायदा बैंक खाता धारक को प्रतिमाह ठीकठाक रकम किराये के रूप में दी जाती है। बुजुर्ग दंपती को पांच दिन डिजिटल अरेस्ट कर 1.73 करोड़ की ठगी के मामले में आरोपी महाराष्ट्र के निलेश बालकृष्ण ने अपनी फर्म का खाता साइबर ठगों को एक लाख रुपये प्रतिमाह किराये पर दे रखा था। साइबर ठग कई व्हाट्सएप और टेलिग्राम ग्रुप बनाकर उनमें लोगों को जोड़कर प्रतिमाह 10 से 20 हजार रुपये बैंक खाता किराये पर देने का लालच देते हैं।
बैंक से रिटायर्ड सूरज प्रकाश के पास 17 सितंबर को एक कॉल आई थी। कॉलर ने खुद को टेलीकॉम विभाग से बताते हुए कहा कि आपके सभी रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बंद किए जा रहे हैं। आपके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर केनरा बैंक में एक खाता खोला गया है। जिसमें 6.80 करोड़ रुपये मनी लॉन्ड्रिंग के आए हैं। इसके बाद उनके व्हाट्सएप नंबर पर कॉल आई। कॉलर ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए उनके खिलाफ महाराष्ट्र में रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी दी। उन्हें जेल भेजने की धमकी देकर डराया। पांच दिन तक दंपती को डिजिटल अरेस्ट कर पांच दिन में चार बैंक खातों में 1.73 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए थे। रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस की तीन टीमों को महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना रवाना किया गया था। तेलंगाना के नामिजला राजकुमार को पुलिस ने नोटिस तामील कराया था। वह मेरठ आया तो पुलिस ने पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद निलेश बालकृष्ण और नावेद एजास सैयद को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया गया। सोम्यासिस पाईन की पश्चिम बंगाल से गिरफ्तारी हुई। निलेश बालकृष्ण ने बताया कि व्यापार में उसे घाटा हो गया था। इसके बाद वह साइबर अपराधियों के संपर्क में आ गया था। उसने अपनी फर्म का बैंक खाता एक लाख रुपये प्रतिमाह साइबर ठगों को दे दिया था। एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
25 से ज्यादा बैंक खातों में 45 लाख रुपये फ्रीज कराए
बुजुर्ग दंपती से साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने 25 से ज्यादा बैंक खातों में 45 लाख रुपये फ्रीज कराए हैं। अन्य खातों की धनराशि फ्रीज करने की कार्रवाई की जा रही है। नामिजला राजकुमार ने अपने व अपनी पत्नी के नाम पर 12 बैंक खाते खुलवा रखे हैं। जिनमें से कुछ खाते किराये पर ट्रेडिंग कंपनी को दे रखे थे।
रिकवरी से बचने को क्रिप्टो करेंसी में करते थे निवेश
राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर आरोपियों के बैंक एकाउंट से जुड़ी मेरठ के अलावा विभिन्न राज्यों में 14 शिकायतें दर्ज हैं। रिकवरी से बचने के लिए ये लोग ठगी की रकम क्रिप्टो करेंसी में कर देते थे। क्रिप्टो करेंसी में निवेश होने पर पुलिस के लिए रकम ट्रेस कर पाना काफी मुश्किल हो जाता है।