क्लीनिकों, लैब और अस्पतालों में सन्नाटा रहा। छीपी टैंक, बच्चा पार्क, सिटी सेंटर, बेगमबाग, इंदिरा चौक के आसपास के कांप्लेक्स में क्लीनिक नहीं खुले। गढ़ रोड, सूरजकुंड, शास्त्रीनगर से लेकर हापुड़ चौराहे पर भी क्लीनिक बंद रहे। हालांकि मेडिकल स्टोर खुले रहे।
अमरोहा से पहुंची वृद्धा
ईव्ज चौराहे के पास एक अस्पताल में अमरोहा से अपने बेटे मूलचंद के साथ आंख दिखाने आईं बुजुर्ग महिला ओमवती को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। मूलचंद ने बताया कि उन्हें नहीं पता था कि अस्पताल आज बंद रहेगा। नहीं तो इतनी दूर से नहीं आते। अब वापस जाना पड़ेगा।
कान में दर्द था, पर डॉक्टर नहीं मिले
मोदीपुरम से अपने माता-पिता के साथ आए बालक आयुष ने बताया कि वह अपना कान दिखाने आया था, उसके कान में कई दिन से दर्द था, पर डॉक्टर अंकल नहीं मिले। अब वह दोबारा आएगा।
बागपत से आए, वापस लौटे
संतोष राणा पत्नी को लेकर बागपत से कचहरी रोड स्थित एक क्लीनिक पर आए थे, लेकिन चिकित्सक नहीं मिलने केकारण उन्हें अब वापस जाना पड़ रहा है। काफी दूर से आए हैं, इसलिए दिक्कत हो रही है।
चिकित्सक न मिलने से लाचार
कंकरखेड़ा से आए मोहित की पत्नी बीमार है। उनका एक चिकित्सक केयहां इलाज चल रहा है। उन्हें नहीं पता था कि चिकित्सक हड़ताल पर हैं। अब वह वापस जाने को मजबूर हैं।
नहीं मिले चिकित्सक
तूलिका अग्रवाल और शास्त्रीनगर से आए विपिन गुप्ता भी छीपी टैंक पर चिकित्सकों को नहीं दिखा सके। इनकेजैसे सैकड़ों लोग रहे जो चिकित्सकों की हड़ताल की वजह से परेशान रहे।
सरकारी अस्पतालों में रही भीड़
सरकारी अस्पतालों से लोगों को थोड़ी राहत मिली। निजी अस्पतालों में हड़ताल का असर सरकारी अस्पतालों में देखने को मिला, जहां मरीजों की संख्या बढ़ गई। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में ऐसे काफी मरीज पहुंचे, जो निजी डॉक्टर न मिलने के कारण यहां आए थे। सबसे ज्यादा फर्क इमरजेंसी पर पड़ा। वहां मरीज ज्यादा पहुंचे।
- बिल में आयुर्वेद सहित भारतीय चिकित्सा पद्धति के चिकित्सकों को ब्रिज कोर्स करने के बाद एलोपैथी की प्रैक्टिस की इजाजत दी गई है। इससे बड़े पैमाने पर चिकित्सा का स्तर गिरेगा।
- आईएमए की मांग है कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति के तहत प्रैक्टिस के लिए एमबीबीएस का मानक बना रहना चाहिए।
- पूरे देश के मेडिकल संस्थानों में प्रवेश के लिए सिर्फ एक परीक्षा का आयोजन किया जाएगा, जो नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट होगा। ग्रेजुएशन खत्म करने के बाद भी प्रैक्टिस करने के लिए एक और परीक्षा देनी होगी। इस परीक्षा को पास करने के बाद ही प्रैक्टिस करने का लाइसेंस मिलेगा। इसके साथ ही पोस्ट ग्रेजुएशन की भी अनुमति मिलेगी।
- यह संस्था देश के निजी मेडिकल कॉलेजों की 40 प्रतिशत सीटों की फीस भी तय करेगा, जबकि बाकी 60 प्रतिशत सीटों की फीस तय करने का अधिकार मेडिकल कॉलेज का होगा।
- इस बिल के आते ही 6 महीने का ब्रिज कोर्स करने के बाद देश के आयुर्वेद और यूनानी डॉक्टर भी अन्य डॉक्टरों की तरह अंग्रेजी दवाएं लिख सकेंगे।
सफल रहा कार्य बहिष्कार: आईएमए अध्यक्ष
आईएमए अध्यक्ष डॉ. मेधावी तोमर ने कहा कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का कार्य बहिष्कार पूर्ण रूप से सफल रहा। आगे की रणनीति तैयार की जा रही है। आईएमए के जो भी निर्देश आएंगे, उनका पालन किया जाएगा।