नई सरकार में कई नई योजनाआें पर काम होगा। जहां उलझे प्रकरणों को निपटाने का इंतजार है तो वहीं जमीन के ऐसे नए प्रोजेक्ट पर काम होगा जिसकी वजह से अहम योजनाएं लंबित हैं। होम वर्क पूरा है। बस एमडीए अधिकारी मतगणना का इंतजार कर रहे हैं।
कई प्रस्ताव ऐसे हैं जिनकी रूपरेखा तैयार है पर बस इंतजार सरकार गठन का है। ऐसे ही कई प्रस्ताव एमडीए में हैं। किसानों को प्रतिकर के बदले भूखंड दिए जाने पर काम चल रहा है। हालांकि अभी केवल गणना की जा रही है और नई सरकार में ही इसका फाइनल रूप सामने आएगा। इसके अलावा एमडीए जमीन संबंधी अन्य कई प्रस्तावाें पर विचार कर रहा है। मसलन ऐसे मामले जहां जमीन नहीं मिल रही है और काम पूरे करने हैं। ऐसे प्रस्तावों पर नए सिरे से विचार होगा। यदि कहीं दूसरी जगह जमीन मिली तो वहां भी ली जा सकती है। जैसे टीपीनगर को शिफ्ट करने का प्रस्ताव पुराना हो चला है पर हल नहीं निकल पा रहा है। ऐसे में एमडीए अन्य जगह लेने पर भी विचार कर सकता है। जुर्रानपुर फाटक को लेकर सालों से मशक्कत चल रही है। इसका विकल्प तलाशने पर भी विचार किया जा रहा है। काम हो तो कैसे हो? इनर रिंग रोड का मसला पुराना हो चुका पर काम हो ही नहीं रहा है। ऐसे में इस बाबत भी विचार किया जा रहा है क्या करें।
उपशा के पाले में जा सकती है गेंद
प्रस्तावित इनर रिंग रोड तीन हाईवे को जोड़ रही है। मेरठ बुलंदशहर, एनएच 119 तथा एनएच 58 तीन मार्गों से यह कनेक्ट होगी। ऐसे में प्रस्ताव यह बन रहा है कि उप्र स्टेट हाइवे अथॉरिटी इसे ले और नोटिफिकेशन करे। जमीन लेकर इसे बनाए। पहले भी एक बार यह बात उठ चुकी है, लेकिन नई सरकार में एमडीए अधिकारी इसे जोरशोर से शासन में उठाने की बात कर रहे हैं। कारण कि यदि इन तीनों हाईवे को जोड़ना है तो यह उपशा का ही पार्ट हुआ। बुलंदशहर से पानीपत तक जाने के लिए इसी से होकर गुजरना होगा। इन्हीं तर्कों के आधार पर इस प्रकरण को शासन में नए सिरे से रखने की तैयारी है।