नोटबंदी के दौर में तमाम टेंशन झेलने वाले लोगों में से कुछ की टेंशन एक बार फिर रिटर्न होने जा रही है। आयकर विभाग की ओर से जारी रिटर्न फार्म में नोटबंदी के दौरान बैंक खाते में दो लाख से अधिक रकम जमा करने वालों को अब इसका विवरण देना होगा। यहीं नहीं पचास लाख से अधिक की रिटर्न जमा करने वालों के लिए पूरी संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में टैक्स की मार से बचने के लिए लोग निवेश के नए तरीके भी ढूंढ रहें हैं।
आयकर विभाग की ओर से इस बार सात प्रकार के रिटर्न फार्म जारी होने हैं। इनमें से अभी दो प्रकार के फार्म ही विभाग में आए हैं। यह दोनों फार्म सिर्फ वेतनभोगियों और छोटे व्यापारियों से ही संबंधित हैं। अभी किराये से प्राप्त आय, बड़े व्यापार, सोसायटी, कंपनी और साझेदारी के रिटर्न फार्म आने शेष हैं, लेकिन इन दोनों फार्मों ने तमाम लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। इन फार्मों में अबकी बार एक विशेष कॉलम दिया गया है, जिसमें नोटबंदी के दौर में दो लाख रुपये से अधिक बैंक खाते में जमा करने वालों को इसका विवरण देना होगा।
व्यापारियों को लगा झटका
सरकार की ओर से नोटबंदी के दौर में चालू खाते में 12.50 लाख रुपये और बचत खाते में 2.50 लाख रुपये जमा करने की छूट थी। अब दो लाख से अधिक की रकम जमा करने वालों को रिटर्न फार्म में इसका उल्लेख करने से यह रकम उनकी आय में जुड़ जाएगी। यह नियम सभी प्रकार के खातों पर लागू किया गया है। इससे चालू खाते में दो लाख से कहीं अधिक की रकम जमा करने वाले व्यापारी परेशान हैं।
बड़े उद्यमियों की बढ़ेगी परेशानी
ऐसे उद्यमी या व्यापारी जो 50 लाख या इससे ज्यादा का रिटर्न फाइल करते हैं। उन्हें अब तक सिर्फ आय का ब्यौरा देना होता था, लेकिन इस बार अपनी पूरी संपत्ति का विवरण आयकर विभाग को देना होगा। इससे उद्यमी परेशान हैं।
संपत्ति बेची है तो खोलें, कैपिटल गेन एकाउंट
सीए अभिषेक गोयल के अनुसार संपत्ति बेचने पर उससे प्राप्त धन पर भी आयकर विभाग की नजर है। इसमें दो साल तक संपत्ति खरीद की छूट है, लेकिन इसके लिए अलग प्रावधान है। आयकर विभाग के नियमों के अनुसार यदि किसी ने कोई संपत्ति दस लाख रुपये में खरीदी थी और अब उसे 15 लाख रुपये में बेचा है, तो उसे पांच लाख रुपये पर टैक्स देना होगा। लेकिन यदि कोई भी व्यक्ति इस संपत्ति को बेचकर एक-दो माह में ही दूसरी संपत्ति खरीद लेता है तो उसे टैक्स नहीं देना होगा। टैक्स की अदायगी समय अवधि अधिक होने पर ही देनी होगी। इससे बचने के लिए बैंक में कैपिटल गेन एकाउंट खोलना होगा। यह दो साल के लिए होगा। इस एकाउंट से खाता धारक सिर्फ संपत्ति खरीद के लिए पैसा निकाल सकता है। अन्य किसी काम के लिए रकम निकालने पर जितनी रकम निकाली है, उस पर टैक्स देना होगा। यदि दो साल तक संपत्ति नहीं खरीदी जाती है तो आयकर विभाग उस रकम को टैक्स के दायरे में ले आएगा।