अवैध खनन के लिए बदनाम खनन विभाग का अब नया खेल सामने आया है। सरकारी योजनाओं में होने वाले निर्माण कार्यों में मिट्टी प्रयोग पर भी नियमों का पालन नहीं किया गया। इससे सरकारी खजाने को अकेले मेरठ से ही 16.57 करोड़ रुपये का चूना लगा है। सरकारी विभाग में काम करने वाले ठेकेदारों के बिलों की जांच के बाद यह मामला खुलने पर हड़कंप मचा है। शासन ने इस पर जवाब मांगा है। इससे अलग गौर करने वाली बात यह भी है कि मिट्टी के अवैध खनन की लगातार शिकायतें आती रहती हैं।
ये हैं नियम
मिट्टी खनन पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्रतिबंध है। हालांकि, सरकारी योजनाओं में होने वाले निर्माण के लिए नियमानुसार खनन की अनुमति है। इसके लिए मिट्टी का खनन करने वाले को अनुमति लेकर उसकी रायल्टी जमा करनी होती है। इसके साथ ही ठेकेदार को भी इस मिट्टी को ढोकर ले जाते वक्त एक निश्चित प्रपत्र (फार्म एमएम 11) भरना होता है। इस प्रपत्र के बिना किसी भी वाहन से मिट्टी की ढुलाई नहीं कर सकते हैं। जब ठेकेदार अपने काम का बिल जमा करता है, तो उसे इस फार्म की प्रति भी अपना काम पूरा होने के बाद जमा करनी होती है। खनिज विभाग के नियमों के अनुसार सिर्फ रेलवे के काम में फार्म एमएम 11 भरने की छूट है।
फार्म 11 न भरवाकर दिया चूना
खनन विभाग ने ठेकेदारों को मिट्टी खनन की अनुमति देकर रायल्टी तो वसूल ली लेकिन उनसे फार्म एमएम 11 नहीं भरवाया। जबकि इस प्रपत्र के बिना मिट्टी ढुलाई पूरी तरह अवैध है और ऐसे मामलों में तय रायल्टी से पांच गुना वसूले जाने का नियम है। ऐसे में मेरठ सहित मुरादाबाद और इलाहाबाद के जून 2013 से नवंबर 2016 तक के जब 459 प्रकरणों की जांच ऑडिट टीम ने की तो पाया कि किसी में भी एमएम 11 फार्म नहीं था। इन ठेकेदारों से रायल्टी के रूप में 8,04,40,281 रुपये जमा किया गया। जबकि यह फार्म न होने पर इनसे नियमानुसार पांच गुना वसूली होनी थी, जो 40,22,01,405 रुपये बैठती है। इसमें मेरठ का हिस्सा 16.57 करोड़ रुपये बैठता है। इस मामले में भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय के वित्त नियंत्रक इंद्रजीत विश्वकर्मा ने पत्र जारी कर जवाब मांगा है।
सेटिंग का यह खेल
खनन में पूरी तरह तहसील और खनन विभाग की सेटिंग होती है। निजी भवनों, कॉलोनियों आदि में मिट्टी खनन की अनुमति पूरी तरह प्रतिबंधित है। बावजूद इसके शहर के चारों तरफ बन रही कॉलोनियों में जमकर मिट्टी का भराव हुआ और हो रहा है। इनकी मिट्टी कहां से आती है और कहां खनन हो रहा है, इसे देखने की कभी खनन या तहसील विभाग ने जरूरत नहीं समझी। यही नहीं, रोजाना रात में शहर के बाहरी इलाकों में खेतों के भीतर मशीनों से मिट्टी खनन शुरू हो जाता है और ट्रकों से मिट्टी ढोने का काम सुबह तक चलता है। सेटिंग के खेल में इस पर सभी चुप्पी साधे बैठे रहते हैं।
अनुमति की आड़ में खेल
इसके अलावा जिन सरकारी कामों के लिए मिट्टी खनन की अनुमति ली जाती है। उसमें भी भारी खेल होता है। सरकारी काम की मापतौल के आधार पर ठेकेदार मिट्टी खनन की अनुमति लेकर उसकी रायल्टी जमा करता है। लेकिन खनन अनुमति से चार से छह गुना तक होता है। यह बढ़ा हुआ खनन पूरी तरह अवैध होने के बावजूद सेटिंग से होता है।
दो विभागों की सेटिंग
दोनों विभाग एक-दूसरे से सेटिंग किये होते हैं। शिकायत पर यदि जांच होती है तो तहसील विभाग ठेकेदार से सेटिंग कर उसके पक्ष में रिपोर्ट देता है। इसके बाद खनन विभाग इस रिपोर्ट के आधार पर जांच कर अपनी अंतिम मुहर लगाता है, जिसमें उसकी भी सेटिंग होती है। दोनों विभागों की जांच में ठेकेदार को अधिकांश क्लीन चिट दे दी जाती है। यदि कहीं दबाव बनता है, तो बहुत कम अवैध खनन दिखाकर उससे निर्धारित रायल्टी से पांच गुना दंड लगाकर वसूल करके छोड़ दिया जाता है।
कोट
फार्म एमएम 11 खनन पट्टे के लिए भरा जाता है। हमारे यहां कोई पट्टा जारी नहीं हुआ तो एमएम 11 फार्म का औचित्य ही नही है। जो पत्र आया है, उसे देखकर जवाब भेज दिया जाएगा। -गौरव वर्मा, एडीएम (वित्त एवं राजस्व)