फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सात दिन तपेगी धरती, नहीं मिलेगी चंद्रमा की शीतलता

विज्ञापन
विज्ञापन
मेरठ। ज्येष्ठ शुक्ल द्वितीया रविवार मध्यरात्रि के बाद 2:33 बजे सूर्यदेव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर गए हैं। इसके साथ ही 25 मई से नौतपा शुरू हो जाएंगे, जो कि 2 जून तक रहेंगे। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स के अनुसार, इन दिनों सूर्य कर्क रेखा के सबसे करीब रहता है। ऐसे में कर्क रेखा के आसपास वाले क्षेत्रों में सूर्य की सीधी किरणें पड़ने से भीषण गर्मी होती है। इसका असर उत्तर भारत में भी नजर आएगा। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार, इस समयकाल में ही सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं। शुरू के नौ दिन रोहिणी के तपने के माने गए हैं। साल में एक बार ही सूर्य और रोहिणी का समागम होता है। ज्येष्ठ माह में सूर्य के वृषभ राशि के 10 अंश से 23 अंश 40 कला तक नौतपा कहलाता है।
विज्ञापन

सात दिन रहेगी भीषण गर्मी
25 व 26 मई को चन्द्रमा मिथुन राशि में रहेंगे। 27 व 28 मई को चन्द्रमा कर्क और 29 व 30 मई को सिंह राशि में रहेंगे। 31 मई और 1 व 2 जून को चन्द्रमा कन्या राशि में रहेगा। चन्द्रमा के मिथुन, कर्क व सिंह राशि में रहने के दौरान विशेष गर्मी के योग बन रहे हैं। वहीं मिथुन राशि में बुध व राहु के साथ चन्द्रमा का योग बनेगा। इसके चलते प्रचंड गर्मी हो सकती है। 27 और 28 मई को सामान्य बादल छाए रहेंगे, लेकिन चन्द्रमा पर शनि की दृष्टि आने से गर्मी बनी रहेगी। 29 व 30 मई को भी भीषण गर्मी रहेगी।
आंधी, बारिश के योग
शुक्र का तारा एक जून को सुबह 05:28 बजे पश्चिम दिशा में अस्त हो रहा है। शुक्र का नौतपा में अस्त होना आंधी, बारिश के योग बनाएगा। अगर ग्रह गोचर के हिसाब से देखें तो 26 मई से मंगल व शनि का समसप्तक योग बनने जा रहा है। इसके चलते तापमान में बढ़ोतरी होगी।
विज्ञापन

चंद्रमा नहीं देंगे शीतलता
सूर्य 12 राशियों 27 नक्षत्रों में भ्रमण करता है। ज्योतिष के अनुसार, सूर्य कुंडली में जिस भी ग्रह के साथ बैठता है उसके प्रभाव को अस्त कर देता है। रोहिणी नक्षत्र का अधिपति ग्रह चंद्रमा होता है। ऐसे में जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है तो वह चंद्रमा की शीतलता के प्रभाव को खत्म कर देता है।
महिलाएं लगाएं मेहंदी
मान्यता के अनुसार, नौतपा के दौरान महिलाएं हाथ पैरों में मेहंदी लगाती हैं। मेहंदी की तासीर ठंडी होने से गर्मी से राहत मिलती है। गर्मी से बचने के लिए दही, मक्खन और दूध का उपयोग ज्यादा किया जाता है। नारियल पानी और ठंडक देने वाली दूसरी और भी चीजें खाई जाती हैं।
मानसून का गर्भकाल शुरू
रोहिणी चन्द्रमा का नक्षत्र है, जो जल तत्व होता है। सूर्य का ताप और रोहिणी का जल तत्व मिलकर मानसून का भविष्य तय करते हैं। नौतपा से 21 जून तक का समय शास्त्रों के अनुसार वर्षा का गर्भकाल कहा जाता है। सूर्यदेव रोहिणी के साथ करीब 15 दिन रहते है, इसमें शुरू के 9 दिन चन्द्रमा जिन 9 नक्षत्रों में रहता है। उन्हें नौतपा कहते हैं। वहीं इस साल संवत्सर के राजा बुध हैं और रोहिणी का निवास संधि में है। इससे बारिश तो समय पर आ जाएगी। लेकिन कहीं ज्यादा तो कहीं कम बारिश हो सकती है।
नौतपा में नक्षत्रों का प्रभाव
--25 मई: मृगशिरा शाम को तेज गर्मी
--26 मई: राहु प्रधान मंगल, सुर्खी गर्मी
--27 मई: गुरु प्रधान पुनर्वसु, उमस वाली गर्मी
--28 मई: शनि प्रधान पुष्य तेज हवा, बूंदाबांदी
--29 मई: बुध प्रधान आश्लेषा, तेज गर्मी
--30 मई: केतु प्रधान मघा उमस, तेज गर्मी
--31 मई: सूर्य प्रधान उत्तरा फाल्गुनी, प्रचंड गर्मी, शाम को बारिश
--01 जून: चंद्र प्रधान हस्त बारिश की संभावना
--02 जून: मंगल प्रधान चित्रा, उमस और गर्मी
इंसेट---
नौतपा को वैज्ञानिक मान्यता भी
नौतपा को ज्योतिष ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक मान्यता भी प्राप्त है। एस्ट्रो आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि वैज्ञानिक मतानुसार नौतपा की अवधि के दौरान सूर्य की सीधी किरणें पृथ्वी पर आती है और तापमान बढ़ता है। अधिक गर्मी से मैदानी क्षेत्रों में निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है, जो समुद्र की लहरों को आकर्षित करता है। इस कारण ठंडी हवाएं मैदानों की ओर बढ़ती है। चूंकि समुद्र उच्च दबाव वाला क्षेत्र होता है, इसलिए हवाओं का यह रूख अच्छी बारिश का संकेत देता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें