मेरठ। सीसीएसयू कैंपस-कॉलेजों में यूजी कोर्सों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू हो गई है। नए सत्र से छात्र-छात्राएं राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बनाए गए सिलेबस को पढ़ेंगे। बुधवार को सीसीएसयू में हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक में सभी 36 कोर्सों के सिलेबस पर मुहर लग गई। 26 स्किल आधारित कोर्स भी छात्र-छात्राओं को पढ़ने को मिलेंगे। डीलिट् और डीएससी की पढ़ाई अब आसान नहीं होगी। यूजीसी के नए नियमों के तहत तीन साल में इनकी डिग्री पूरी करनी होगी।
कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में बुधवार को एकेडमिक काउंसिल की बैठक हुई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय और कॉलेजों में अब 70 फीसदी सिलेबस समान हो गया है। 30 फीसदी सिलेबस ही विवि में अलग रहेगा। जो सिलेबस फाइनल किए गए थे, उन्हें बुधवार को एकेडमिक काउंसिल की बैठक में पास कर दिया गया। जल्द ही सभी विषयों के सिलेबस विवि की वेबसाइट पर अपलोड कर दिए जाएंगे।
नए पाठ्यक्रम में छात्र-छात्राओं को मुख्य विषयों के साथ स्किल आधारित कोर्स भी करने होंगे। इसमें 26 विषय के सिलेबस को अनुमोदित किया गया। इन विषयों को फाइनल करने के लिए कमेटी का गठन कर दिया गया है, जल्दी ही इन विषयों को वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाएगा।
इसके साथ ही विवि परिसर में संचालित सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज में बीटेक ऑनर्स की डिग्री भी शुरू की जाएगी। प्रोफेसर एमके गुप्ता के सुझाव पर यूजी में कंप्यूटर साइंस के उच्च शिक्षा विभाग से प्राप्त सिलेबस को पास कर दिया गया है।
बैठक में कुलपति प्रोफेसर एनके तनेजा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में छात्रों को गुणवत्ता परक शिक्षा देने के साथ-साथ संस्थान को भी अपनी गुणवत्ता को बनाए रखने की चुनौती है। ऐसे में सभी कॉलेज इस पर कार्य करें। बैठक में प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला, रजिस्टार धीरेंद्र कुमार वर्मा, प्रो. एमके गुप्ता, प्रो. नवीन चंद्र लोहनी, प्रो. एसएस गौरव, प्रो. हरे कृष्ण, प्रो. जयमाला, डॉ. स्नेहलता, डॉ दिव्या नाथ सभी संकायाध्यक्ष एवं कालेजों के प्राचार्य एवं सदस्य मौजूद रहे।
डीलिट्-डीएससी में 10 जर्नल प्रकाशित होना जरूरी
परिषद की बैठक में डीलिट् और डीएससी के नए आर्डिनेंस को भी स्वीकार कर लिया है। नए आर्डिनेंस के मुताबिक अभ्यर्थी को 10 साल की सेवा जरूरी है। इसके अलावा 10 पेपर में अपने जर्नल प्रकाशित कराने होंगे। इनमें तीन पेपर यूजीसी की श्रेणी-1 में शामिल होने चाहिए। दोनों कोर्स तीन साल की अवधि में पूरे करने होंगे।