अधिवक्ता फरहा फैज के साथ नसीमा अपने पति और बच्चों के साथ
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तीन तलाक का कानून बनते ही पति अपनी पत्नी को लेने के लिए ससुराल पहुंच गया। पत्नी को न सिर्फ अधिवक्ता के समक्ष समझौता नामा लिखकर दिया, बल्कि लगभग 750 वर्ग फुट जमीन पत्नी के नाम करने का भी आश्वासन दिया। कानून बनने के बाद इस नई पहल को लेकर चर्चा बनी हुई है।
सहारनपुर में कुतुबशेर के खुंगर कॉलोनी निवासी नसीमा का निकाह वर्ष 2015 में विकास नगर उत्तराखंड के हरबर्टपुर निवासी मो. अली के साथ हुआ था। उनके यहां जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ। नसीमा के अनुसार उसका पति एवं ससुराल के लोगों ने कुछ समय बाद ही उसके साथ मारपीट एवं दहेज के लिए उत्पीड़न शुरू कर दिया। लगभग आठ माह पूर्व उसे मारपीट कर तलाक देने की बात कहते हुए घर से निकाल दिया। तब से वह अपने मायके में आकर रहने लगी। मामले में समझौते के लिए कई बार पति और ससुरालियों को उसके परिजनों ने बुलाया लेकिन वे आने के लिए तैयार नहीं हुए। उसे पता चला कि उसका पति एवं ससुराल के लोग दूसरी शादी की तैयारी कर रहे हैं। उन्हें जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता फरहा फैज के साथ जाकर एसएसपी को प्रार्थना पत्र दिया और कार्रवाई की मांग की।
अधिवक्ता फरहा फैज ने बताया कि इसी दौरान तीन तलाक के विरुद्ध कानून बन गया। जिसके बाद नसीमा ने पति एवं ससुरालियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी कर ली। जब इस बात का पता ससुरालियों को चला तो उन्होंने तुरंत नसीमा और उसके परिजनों से संपर्क किया और नसीमा को घर ले जाने के लिए तैयार हो गए।